आखिर प्रणब दा ने संसद में क्यों मांगी माफी?
केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी शुक्रवार को संसद में अपना आपा खो बैठे। उन्होंने गुस्से में विपक्षी दलों के सदस्यों से कहा कि वे उन्हें अपनी बात पूरी करने दें। मुखर्जी की टिप्पणी के बाद सदन में शोर मच गया। भारी शोर-शराबे के बीच अध्यक्ष मीरा कुमार ने सदन की कार्यवाही कुछ देर के लिए स्थगित कर दी। सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर केंद्रीय वित्त मंत्री ने अपने बर्ताव के लिए माफी भी मांगी।
काले धन पर पूछे गए सवाल का जवाब देते वक्त विपक्ष की टोका टाकी से झुंझलाए मुखर्जी ने कहा, "मुझे अपनी बात रखने दें। इसमें अवरोध पैदा न करें।" वित्त मंत्री की टिप्पणी पर विपक्षी सांसदों ने शोर-शराबा शुरू कर दिया और नारे लगाते हुए अध्यक्ष के आसन के पास पहुंच गए।
इसके बाद अध्यक्ष ने कुछ देर के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। लगभग 5 मिनट बाद लोकसभा की कार्यवाही फिर शुरू कर दी गई जिसके बाद वित्त मंत्री ने अपने बर्ताव के लिए माफी मांगी। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी सदस्यों ने उन्हें तेज बोलने के लिए उकसाया। उनका मकसद किसी को ठेस पहुंचाना नहीं था।
उन्होंने सदन को बताया कि हसन अली, जिसके खिलाफ विदेशी बैंकों में बड़ी मात्रा में काला धन रखने का आरोप है, को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार देश छोड़कर जाने की इजाजत नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि सभी देश का कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है।













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