मप्र में 13 नए उद्योगों में ही शुरू हो पाया उत्पादन
भोपाल, 25 फरवरी (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा देसी-विदेशी निवेशकों को लुभाने की कोशिशों की हकीकत अब सामने आने लगी है। पिछले चार वर्षो में हुए 198 करारनामों में से सिर्फ 13 उद्योगों में ही उत्पादन शुरू हो पाया है। इतना ही नहीं, उद्योगपतियों की वादाखिलाफी के चलते सरकार को 57 करारनामों को निरस्त तक करना पड़ा है।
प्रदेश में औद्योगिक विकास के लिए चल रही कोशिशों के क्रम में देश और देश के बाहर वर्ष 2007 से अब तक 21 'इंवेस्टर्स मीट' आयोजित की गई है। इन आयोजनों का मकसद निवेशकों को प्रदेश में निवेश के लिए आकर्षित करना रहा है। ये आयोजन कागजी तौर पर सफल भी रहे हैं। इस दौरान 198 औद्योगिक घरानों ने उद्योग स्थापित करने के लिए सरकार से करार भी किए।
विधानसभा में प्रतिपक्ष के कार्यकारी नेता एवं कांग्रेसी विधायक चौधरी राकेश सिंह द्वारा शुक्रवार को पूछे गए सवाल के जवाब में उद्योग मंत्री की अनुपस्थिति में संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि अब तक हुई 21 इंवेस्टर्स मीट में 198 करार हुए थे, जिनमें से 13 में उत्पादन शुरू हो चुका है और 138 के कार्य प्रगति पर हैं। जिन 57 औद्योगिक घरानों ने करारनामों का पालन नहीं किया है, उनके साथ किए गए करार निरस्त कर दिए गए हैं।
सरकार की ओर से बताया गया है कि निवेशकों को आमंत्रित करने के लिए आयोजित की गई इंवेस्टर्स मीट पर 15 करोड़ रुपये से ज्यादा राशि खर्च की गई है।
विधायक राकेश सिंह ने करार करने वालों की नीयत पर भी सवाल उठाए और चार साल की अवधि बीत जाने के बाद भी उद्योग न स्थापित करने की जांच कराने की मांग की। चौधरी का आरोप था कि औद्योगिक घराने करार कर खदानों की लीज हासिल कर लेते हैं और उनमें उत्खनन भी शुरू कर देते हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर वे उत्पादन शुरू ही नहीं कर पाए हैं, वहीं हमारे संसाधनों का भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं, लिहाजा इसकी जांच होनी चाहिए।
सिंह की मांग पर संसदीय कार्यमंत्री मिश्रा ने आपत्ति जताई और कहा कि जांच की जरूरत नहीं है। विधानसभा अध्यक्ष ईश्वर दास रोहाणी ने सिंह से अपनी मांग लिखित में देने को कहा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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