बागी हुआ गद्दाफी का बेटा, इराक में प्रदर्शन में 9 मरे (राउंडअप)

उधर अमेरिका ने कहा है कि वह लीबिया के खिलाफ कार्रवाई करने पर विचार कर रहा है जबकि भारत अपने नागरिकों को वहां से निकालने के लिए अगले सप्ताह से अभियान शुरू करेगा। भारत ने इस बात का खंडन किया है कि लोगों की वापसी के लिए कोई शुल्क लिया जा रहा है।

इराक में शुक्रवार को हुए प्रदर्शनों में कम से कम नौ लोग मारे गए जबकि हजारों की संख्या में लोगों ने आर्थिक सुधारों, बेहतर सामाजिक सेवा, रोजगार के अवसर और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की मांग को लेकर सख्त सुरक्षा के बीच प्रदर्शन किया।

समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक धार्मिक और सरकारी अधिकारियों ने लोगों से बगदाद के तहरीर स्क्वेयर और अन्य शहरों में प्रदर्शन न करने की चेतावनी दी थी।

सुरक्षा बलों द्वारा इराक के उत्तरी शहर मोसुल में की गई गोलीबारी में पांच प्रदर्शनकारी मारे गए और दर्जनों घायल हुए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि प्रदर्शनकारी एक स्थानीय सरकारी इमारत में घुसने का प्रयास कर रहे थे।

इसके अलावा किरकुक के उत्तर में स्थित हवेजा कस्बे में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में भी चार लोग मारे गए। प्रांतीय परिषद के भवन में आग लगाने के लिए शुक्रवार सुबह करीब 2000 प्रदर्शनकारी यहां जुटे थे।

प्रदर्शनकारियों ने शुक्रवार के दिन को 'रिवोल्यूशन ऑफ इराकी रेज' का नाम दिया है। राज्यपाल पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए बसरा के दक्षिणी शहर में करीब 4000 लोगों ने धरना दिया। प्रदर्शनकारी राज्यपाल की बर्खास्तगी की मांग कर रहे थे।

समाचार पत्र 'अलसुमारिया' के मुताबिक प्रदर्शन के कुछ ही घंटों बाद राज्यपाल शेल्ताग अब्बूद ने अपने इस्तीफे की घोषणा की।

लीबिया में गुरुवार को हुए एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में कर्नल मुअम्मार गद्दाफी का सबसे छोटा पुत्र सैफ अल-अरब सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में उतर गया। उसने संकेत दिया है कि गद्दाफी आत्महत्या कर लेंगे अथवा देश छोड़कर चले जाएंगे।

समाचार एजेंसी 'आईआरएनए' के मुताबिक गद्दाफी ने सैफ को लीबिया के पूर्वी इलाकों में लोकतंत्र समर्थक आंदोलनकारियों को दबाने में सुरक्षा बलों की मदद करने के लिए वहां भेजा था लेकिन सैफ गुरुवार को बेनघाजी के पूर्वी शहर में प्रदर्शनकारियों से मिल गया।

ईरान के टेलीविजन चैनल 'प्रेस टीवी' के मुताबिक गद्दाफी के पुत्रों में सैफ को काफी कम प्रभाव वाला माना जाता है। उसने संकेत दिया है कि अपने तनाशाही शासन के खिलाफ उठते जनविद्रोह को देखते हुए उसके पिता आत्महत्या कर लेंगे अथवा लेटिन अमेरिका के किसी देश में भाग जाएंगे।

राजधानी त्रिपोली से 50 किलोमीटर दूर स्थित अल जाविया में सरकारी बलों के हमलों में 17 लोग मारे गए हैं। घायलों का इलाज करने वाले चिकित्सकों का कहना है कि मरने वालों की संख्या और भी बढ़ सकती है।

सरकारी टीवी के मुताबिक लीबिया में अशांति के दौरान पिछले सप्ताह में 111 सैनिकों सहित 300 लोग मारे गए हैं।

विपक्षी दलों ने त्रिपोली के लोगों से विरोध-प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए कहा है। ऐसा माना जाता है कि त्रिपोली में गद्दाफी की मजबूत पकड़ है। त्रिपोली में क्रांति के समर्थकों का कहना है कि वे शुक्रवार की प्रार्थनाओं के बाद ग्रीन स्क्वेयर में विरोध-प्रदर्शन करने की योजना बना रहे हैं।

गद्दाफी ने गुरुवार को सरकारी टेलीविजन पर दिए एक संदेश में विरोध-प्रदर्शनों के लिए अलकायदा नेता ओसामा बिन लादेन को जिम्मेदार ठहराया और दावा कि लोगों को विद्रोह के लिए उकसाने के लिए भ्रमित करने वाली दवाएं दी गई हैं।

यमन के राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह ने विपक्षी नेताओं के साथ वार्ता शुरू करने के लिए एक विशेष समिति गठित करने का आदेश दिया है।

समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती ने मीडिया की रिपोर्टों के हवाले से बताया कि यमन में प्रदर्शनकारी अमेरिकी समर्थन प्राप्त राष्ट्रपति सालेह की इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। सालेह पिछले 32 वर्षो से सत्ता में बने हुए हैं।

प्रधानमंत्री अली मोहम्मद मेगावर इस समिति के अध्यक्ष होंगे। उम्मीद है कि प्रदर्शनकारियों की मांगों पर गौर करने के लिए वह उनके साथ बातचीत करेंगे।

देश में राजनीतिक सुधारों की मांग को लेकर 5000 से अधिक नागरिकों ने शुक्रवार की प्रार्थना के बाद राजधानी ओम्मान में प्रदर्शन किया। उन्होंने संसद के निम्न सदन को भंग करने की मांग की।

अमेरिकी ने कहा है कि लीबिया में नागरिक अधिकारों के संरक्षण के लिए वह उत्तरी अफ्रीकी देश के खिलाफ कार्रवाई करने पर विचार कर रहा है। लीबिया में पिछले कई दिनों से विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता फिलीप क्राऊले ने कहा, "आने वाले दिनों में हम लीबिया के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं। इस बात पर विचार करने के लिए पूरा समय लिया जाएगा कि उसके खिलाफ किस प्रकार की कार्रवाई की जाए। हम मानते हैं कि लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए लीबिया की सरकार पर दबाव बनाने से ही सफलता मिलेगी।"

भारत लीबिया से अपने नागरिकों को निकालने का अभियान अगले सप्ताह शुरू करेगा। इसके लिए उसने अपने दो युद्धपोतों को तैयार रखा है जबकि राजधानी त्रिपोली से हवाई जहाज अगले सप्ताह उड़ान भरेंगे। लीबिया के लिए एक भारतीय पोत मिस्र से पहले से ही रवाना हो चुका है।

विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा ने नई दिल्ली में शुक्रवार को बताया कि भारत को लीबिया से अपने करीब 18,000 नागरिकों को वापस लाने की इजाजत मिल गई है। इसके लिए अगले सप्ताह हर दिन एयर इंडिया के दो उड़ानों की सेवाएं ली जाएंगी।

लीबिया में करीब 18,0000 भारतीय हैं। कृष्णा ने कहा कि त्रिपोली से लोगों को हवाई सेवाओं के जरिए लाया जाएगा और इस कार्य के लिए विमान तैयार हैं।

लीबिया में फंसे भारतीयों से पैसा ऐंठने की कोशिश कर रहे असामाजिक तत्वों को आड़े हाथों लेते हुए सरकार ने कहा कि वह लोगों की वापसी के लिए कोई शुल्क नहीं ले रही है।

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया, "यह बात सामने आई है कि कुछ असामाजिक तत्व लीबिया स्थित भारतीय दूतावास के माध्यम से भारतीयों की वापसी का प्रबंध करने के लिए भुगतान या सुविधा शुल्क के नाम पर पैसा ऐंठ रहे हैं।"

मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि सरकार ने लीबिया से भारतीयों की वापसी के लिए उन पर किसी तरह का शुल्क नहीं लगाया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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