'प्रणब दा' को फिर आया गुस्सा.. (लीड-1)
विपक्षी दलों के सदस्यों ने केंद्रीय वित्त मंत्री के इस व्यवहार का कड़ा विरोध किया। इसके चलते सदन में हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गई और सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। बाद में मुखर्जी ने अपने व्यवहार के लिए खेद जताया।
दरअसल, काले धन के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन को भारत द्वारा मंजूरी न दिए जाने सम्बंधी एक सवाल पर मुखर्जी के जवाब से विपक्षी सदस्य संतुष्ट नहीं हुए और वे टीका-टिप्पणी करने लगे। इससे मुखर्जी अपना आपा खो बैठे और चेतावनी भरे अंदाज में उन्होंने विपक्षी सदस्यों से उन्हें जवाब देने से रोकने के लिए हिदायत दी। "यह ठीक नहीं है। मुझे मेरी बात पूरा करने दे। इसमें अवरोध पैदा न करें।"
उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि इस मुद्दे पर आप (वामपंथी सदस्यों) कुछ न कहें, क्योंकि इसमें मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के एक नेता भी शामिल हैं। ऐसे में उन्होंने कुछ कहा तो फिर माकपा के लिए असहज स्थिति पैदा हो सकती है।
मुखर्जी के इतना कहते ही वामपंथी सदस्य हंगामा करते हुए अध्यक्ष के आसन के समीप आ गए और नारेबाजी करने लगे। मुखर्जी की टिप्पणी के बाद सदन में शोर मच गया। भारी शोर-शराबे के बीच अध्यक्ष मीरा कुमार ने सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित कर दी। सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर केंद्रीय वित्त मंत्री ने अपने बर्ताव के लिए खेद जताया।
लोकसभा की कार्यवाही जब फिर शुरू हुई तो वित्त मंत्री ने अपने बर्ताव के लिए माफी मांगी लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी सदस्यों ने उन्हें तेज बोलने के लिए उकसाया। उनका मकसद किसी को ठेस पहुंचाना नहीं था।
काले धन से जुड़े सवाल पर मुखर्जी ने इससे पहले अपने जवाब में कहा, "निश्चित तौर पर काले धन का मुद्दा बेहद गम्भीर है। हम काला धन वापस लाने के लिए कदम उठा रहे हैं। 30 वरिष्ठ अधिकारियों को इस मोर्चे पर लगाया गया है। हम सम्बंधित देशों व एजेंसियों से भी लगातार सम्पर्क बनाए हुए हैं।"
विदेशी बैंकों में बड़ी मात्रा में काला रखने के आरोपी हसन अली से सम्बंधित एक सवाल पर मुखर्जी ने कहा, "सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार देश छोड़कर जाने की इजाजत नहीं दी गई है। हम न्यायालय के निर्देशों का नजर रखे हुए हैं। देश का कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है।"
विदेशों में काला धन जमा करने वालों के नाम उजागर करने के सवाल पर उन्होंने कहा, "यह मामला अदालत के विचाराधीन है और जब तक अदालत इन लोगों आरोपी नहीं ठहरा देती, तब तक ये नाम आम आदमी की जानकारी में नहीं आएंगे। अदालत द्वारा आरोपी ठहराए जाने के बाद अपने आप ये नाम सार्वजनिक हो जाएंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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