हिंद महासागर में चीन के लिए पर्याप्त जगह नहीं : मालदीव
नशीद ने अपने तीन दिवसीय दौरे का समापन करते हुए यहां संवाददाताओं से कहा, "हिंद महासागर में संतुलन बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है। अन्य गैर पारम्परिक मित्रों के लिए हिंद महासागर में पर्याप्त जगह नहीं है।"
संवाददाताओं ने जब क्षेत्र में चीन के बढ़ रहे दखल के बारे में पूछा तो नशीद ने कहा, "हम हिंद महासागर में गैर परम्परागत मित्रों की ओर से की जाने वाली सैन्य तैनाती या अन्य किसी तरह की दखलबाजी को स्वीकार नहीं करने वाले हैं। हिंद महासागर, हिंद महासागर है।"
नशीद से जब बीजिंग की कोशिशों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "भारत के साथ हमारा बहुत ही दोस्ताना सम्बंध है। हम अपने मित्रों के साथ ईमानदार बने रहने में विश्वास रखते हैं।"
भारत व चीन के साथ तुलनात्मक व्यापारिक अनुभवों के बारे में पूछे जाने पर नशीद ने कहा, "भारत निवेश के लिए एक बेहतर जगह है। भाषा, संस्कृति, संगीत, भोजन। इन सब के मद्देनजर चीन की बनिस्बत भारत के साथ व्यापार करना बहुत आसान है।"
उन्होंने ने सुबह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की और लूट, समुद्री सुरक्षा व दोनों देशों के बीच व्यापार व निवेश बढ़ाने जैसे कई मुद्दों पर चर्चा की।
नशीद ने कहा, "हमने हिंद महासागर, लूट, जलवायु परिवर्तन और व्यापार व निवेश पर चर्चा की।"
ज्ञात हो कि हिंद महासागर के मध्य स्थित मालदीव के सामने ग्लोबल वार्मिग का बड़ा खतरा बना हुआ है। नशीद ने कहा, "लूट पर लगाम कसना हमारे लिए एक बहुत ही महत्वूपर्ण मुद्दा है। क्योंकि हम हिंद महासागर के मध्य में बैठे हुए हैं।"
उन्होंने नवम्बर में अपने देश में आयोजित होने वाले आठ राष्ट्रों के संगठन, दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) की शिखर बैठक की तैयारियों के बारे में भी चर्चा की।
उन्होंने पिछले वर्ष कानकुन में जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक बातचीत में रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश की तारीफ की।
नाशीद ने गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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