आर्थिक समीक्षा : विकास दर मजबूत, महंगाई पर चिंता (लीड-1)

इसमें अगले कुछ महीनों में औद्योगिक उत्पादन घटने का अनुमान जताते हुए आधारभूत संरचना क्षेत्र की आधे से अधिक परियोजनाओं में देरी को लेकर चिंता व्यक्त की गई है।

केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी द्वारा शुक्रवार को लोकसभा में पेश आर्थिक समीक्षा में कहा गया कि सेवा और निर्माण क्षेत्र में बेहतर विकास दर्ज किया गया है। औद्योगिक उत्पादन विकास दर 8.6 फीसदी, निर्माण क्षेत्र की विकास दर 9.1 फीसदी और सेवा क्षेत्र की विकास दर 9.6 फीसदी रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है। कृषि क्षेत्र में बेहतर 5.4 फीसदी विकास दर की वापसी के साथ ही सभी क्षेत्रों में विकास दर्ज किया गया है।

इसमें कहा गया कि ग्रामीण रोजगार योजना के कारण उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति बढ़ी है, जिसने महंगाई दर के बढ़ने में भूमिका निभाई है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मौद्रिक समीक्षा में और अधिक सख्ती बरते जाने की सलाह दी गई और कहा गया कि ब्याज दर बढ़ाने से महंगाई दर घटाने में मदद मिलेगी। मुख्य उद्योगों में उल्लेखनीय क्षमता विस्तार नहीं होने के कारण औद्योगिक विकास को लेकर चिंता जाहिर की गई है।

समीक्षा में कहा गया है कि वर्ष 2009-10 में सकल घरेलू बचत सकल घरेलू उत्पाद की 33.7 प्रतिशत रही है। वर्ष 2008-09 की बचत दर को भी 32़ 5 प्रतिशत के स्तर से संशोधित करके 32़ 2 प्रतिशत किया गया था।

सरकारी क्षेत्र की बचत वर्ष 2008-09 के 0़ 5 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2009-10 में 2.1 प्रतिशत हो गई। वहीं निजी क्षेत्र की बचत पिछले कुछ वर्षो में 30.1 प्रतिशत से 31़ 9 प्रतिशत के दायरे में रही है।

3जी स्पेक्ट्रम नीलामी और अप्रत्यक्ष करों के अनुमान से बेहतर संग्रह के चलते वर्ष 2010-11 में देश के राजकोषीय संकेतकों का प्रदर्शन बजट अनुमान से बेहतर रहा है। 3जी स्पेक्ट्रम नीलामी और अप्रत्यक्ष करों के अनुमान से ज्यादा संग्रह के चलते राजकोषीय संकेतकों की स्थिति बजटीय अनुमान से बेहतर रही है।

आर्थिक समीक्षा के मुताबिक वर्ष 2010-11 के पहले नौ महीनों में सकल कर राजस्व में 26.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जबकि बजटीय अनुमान 17.9 प्रतिशत वृद्धि का था। वहीं गैर कर राजस्व में 136.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जबकि बजटीय अनुमान 32 प्रतिशत वृद्धि का था।

सर्वेक्षण के अनुसार आधारभूत संरचना क्षेत्र का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। दूरसंचार क्षेत्र का प्रदर्शन जहां बहुत अच्छा रहा तो वहीं कई क्षेत्रों ने अपने निर्धारित लक्ष्य से कमतर प्रदर्शन किया। वर्ष 2007-08 से 2009-10 के दौरान ऊर्जा, सड़क, नई रेलवे लाइन और रेलवे लाइनों के दोहरीकरण के क्षेत्र में कार्य निर्धारित लक्ष्यों से कम रहा।

सड़क परिवहन और राजमार्ग क्षेत्र में 51 प्रतिशत परियोजनाएं एक से 36 महीनों के विलम्ब से चल रही थीं। ऊर्जा क्षेत्र में 20 परियोजनाएं एक से आठ महीने की देरी से चल रही थीं। पेट्रोलियम क्षेत्र में 16 परियोजनाएं एक से 16 महीने पीछे चल रही थीं। समीक्षा में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या मे 19 फीसदी वृद्धि की बात कही गई है।

इसमें कहा गया कि साल 2010 में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या बढ़कर 5.153 करोड़ पर पहुंच गई, जो साल 2009 में 4.33 करोड़ थी। यात्री परिवहन की तरह माल ढुलाई में भी इस अवधि में 30 फीसदी की वृद्धि हुई, जो 34 लाख टन से बढ़कर 47 लाख टन हो गई। उड्डयन क्षेत्र में आगे भी तेज विकास दर्ज किया जाएगा और 2020 तक भारत दुनिया में सबसे तेजी से विकास करने वाला उड्डयन बाजार बन जाएगा।

कोलकाता और चेन्नई हवाईअडड्डे के आधुनिकीकरण की परियोजना पर काम जारी है। परियोजना के मई-अक्टूबर, 2011 तक पूरी हो जाने की उम्मीद है।

समीक्षा में वैश्विक अर्थव्यवस्था में पांच प्रतिशत की तीव्र वृद्धि का अनुमान जताया गया है। इस दौरान नई अर्थव्यवस्थाओं में वृद्धि सशक्त बनी रही, हालांकि कुछ देशों की संवृद्धि मंद है तथा वे विशाल राजकोषीय घाटे तथा उच्च सरकारी ऋण और बेरोजगारी के स्तरों के चलते अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।

समीक्षा के मुताबिक चालू वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाहियों (अप्रैल-दिसम्बर) में देश का निर्यात 29.5 प्रतिशत बढ़कर 164.7 अरब डॉलर हो गया। इस तरह निर्यात लक्ष्य को न सिर्फ प्राप्त कर लिया जाएगा बल्कि देश का निर्यात इस लक्ष्य से ज्यादा रहने के संकेत हैं। अप्रैल-दिसम्बर 2010 में देश का आयात 19 प्रतिशत बढ़ा है।

वर्ष 2007-08 तक भारत का सबसे बड़ा व्यापार सहयोगी रहने वाला अमेरिका अब तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। संयुक्त अरब अमीरात भारत का सबसे बड़ा व्यापार सहयोगी बन गया है और चीन का स्थान दूसरा है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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