आर्थिक समीक्षा : वित्तीय समावेशी पहल महत्वपूर्ण
उन्होंने कहा कि समग्र विकास के दो प्रमुख घटक सामाजिक और वित्तीय समावेशन हैं। मुखर्जी ने कहा कि नियोजित आर्थिक विकास का छह दशकों से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी आबादी का एक बड़ा हिस्सा विशेष रूप से भूमिहीन श्रमिक, मझौले किसान, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग अब भी सामाजिक एवं वित्तीय बहिष्कार का सामना करते हैं। उन्हें इस स्थिति से उबारने के लिए सरकार ने आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान के लिए नीतियां बनाई हैं, ताकि प्रत्येक वर्ग विकास का लाभ हासिल कर सके।
आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि सामाजिक एवं वित्तीय समावेशन के बीच गहरा सम्बंध है। सरकार ने 10 फरवरी, 2011 को वित्तीय समावेशी पहल के रूप में स्वाभिमान योजना का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए शाखा रहित बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराना है। बैंक कारोबारी सुविधाकर्ता की सेवाओं का इस्तेमाल करके धन जमा करने, आहरण जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे। इस कदम से सरकारी सब्सिडी सामाजिक सुरक्षा के लाभार्थियों के खाते में सीधे जमा की जा सकेगी, जिससे वे अपने गांव में ही कारोबारी सुविधाकर्ता मतलब बैंक साथी की मदद से पैसा निकाल पाएंगे।
समावेशी विकास की पहल के रूप में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत अब तक 8.33 लाख प्रत्यायित सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता 'आशा' का चयन किया गया है। इसके अलावा 1572 विशेषज्ञ, 8284 एमबीबीएस डॉक्टर, 26,734 स्टाफ नर्स, 53,552 सहायक नर्स (दाई), 18,272 अर्ध- चिकित्सा कर्मचारी नियुक्त किए गए। कुल 16,338 अतिरिक्त प्राथमिक केंद्र, पीएचसी, सीएचसी और अन्य उपजिला सुविधाएं 24 घंटे अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
सर्वशिक्षा अभियान के तहत सितम्बर, 2010 तक 309,727 नए विद्यालय खोले गए, 2,54,935 विद्यालय भवनों का निर्माण, 11,66,868 अतिरिक्त कक्षों का निर्माण, 8.70 करोड़ बच्चों को पाठ्यपुस्तकों की निशुल्क आपूर्ति तथा 11.13 लाख अध्यापकों की नियुक्ति की गई। इसके अतिरिक्त 14.02 लाख अध्यापकों को सेवाकालीन प्रशिक्षण दिया गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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