भनोट, वर्मा 5 दिन की सीबीआई हिरासत में भेजे गए (लीड-1)
सीबीआई ने अदालत से 7 दिन का रिमांड मांगा था। सीबीआई ने वर्मा और भनोट को बुधवार को गिरफ्तार किया था।
मामले की सुनवाई करते हुए सीबीआई के विशेष न्यायाधीश तलवंत सिंह ने उन्हें 1 मार्च तक सीबीआई की हिरासत में भेज दिया। सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार विरोधी कानून के तहत आपराधिक षड्यंत्र करने और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।
सीबीआई के अनुसार "इन अधिकारियों ने दूसरे लोगों के साथ मिलकर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए समय, स्कोर और परिणाम बताने वाले उपकरण के लिए स्विट्जरलैंड की एक कंपनी को गलत तरीके से 1.07 अरब रुपये का ठेका दिया। ऐसा करते वक्त दूसरे प्रतिभागियों को नजरअंदाज कर दिया गया, जिससे सरकार को बड़ा नुकसान हुआ और कंपनी फायदे में रही। मामले की जांच अभी प्रारंभिक स्तर पर है। दोनों आरोपियों की भूमिका बेहद गंभीर है।"
अदालत ने सीबीआई की याचिका को स्वीकार करते हुए दोनों आरोपियों को 5 दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया। अदालत ने हालांकि दोनों अधिकारियों को घर में पका भोजन करने और परिवार के सदस्यों से मिलने की अनुमति दी है। लेकिन इसके लिए उन्हें सीबीआई से इजाजत लेनी होगी।
बचाव पक्ष के वकील ने यह कहते हुए सीबीआई के आवेदन का विरोध किया कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ सूत्रों के आधार पर मामले दर्ज किए गए हैं और सूत्र हमेशा सही नहीं होते। भनोट के वकील रमेश गुप्ता ने कहा कि उन्होंने उस फैसले पर केवल अमल किया, जो खेल मंत्रालय और राज्य सरकार की 30 सदस्यीय समिति ने किया। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरे लोगों को बचाने के लिए भनोट को गिरफ्तार किया गया है।
वी. के. वर्मा का बचाव करते हुए उनके वकील अमान लेखी ने कहा कि वर्मा केवल एक कर्मचारी थे, उनकी सीमित भूमिका थी। फैसला लेने वालों में वह नहीं थे। उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है।
इससे पहले वर्मा ने कहा कि मीडिया मामले को उछाल रहा है। कुछ समय बाद सब साफ हो जाएगा और सच सामने आ जाएगा।
भनोट ने भी कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया। सभी फैसले बोर्ड द्वारा सामूहिक रूप से लिए गए। सच सामने आएगा। मीडिया मामले को उछाल रहा है, जिसकी उन्हें उम्मीद नहीं थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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