विपक्ष की भावना हम नहीं समझ सके : प्रणब
जेपीसी के गठन के लिए लोकसभा में प्रस्ताव पेश करते हुए प्रणब ने कहा, "विपक्ष की जेपीसी की मांग के चलते संसद का पिछला शीतकालीन सत्र पूरा का पूरा बर्बाद हो गया। हमें इसका खेद है। इस मसले पर विपक्ष की भावना का आकलन करने में मैं असफल रहा।"
उन्होंने कहा, "2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले से जुड़ी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट पर तीन पहलुओं पर कार्रवाई हो रही थी। लेखा सम्बंधी मामले की जांच लोक लेखा समिति (पीएसी) कर रही थी, आपराधिक व अन्य मामलों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कर रही थी जबकि नीतिगत मामलों की जांच के लिए एक सदस्यीय आयोग का गठन किया गया था। इसलिए हम समझ रहे थे कि जेपीसी की कोई आवश्यकता नहीं थी।"
उन्होंने कहा, "तहलका के समय हम भी जेपीसी की मांग कर रहे थे उस समय अरुण जेटली ने कहा था कि सदन के पटल पर चर्चा से बेहतर कोई अन्य समूह नहीं हो सकता।"
प्रणब ने इस दौरान संसदीय कार्यवाही बाधित होने पर चिंता जताई और भविष्य में इसकी पुनरावृति न हो, इसके ठोस उपाय किए जाने पर जोर दिया।
उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर 10 अक्टूबर 1958 की वहां की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वहां तीन दिनों में तीन प्रधानमंत्रियों ने शपथ ली और उपाध्यक्ष को सदन में गोली मार दी गई थी। "मैं भारत में ऐसी परिस्थिति की कल्पना नहीं कर रहा लेकिन यदि विधायिका अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं करेगी तो ऐसी ही स्थिति पैदा होगी जो किसी को स्वीकार्य नहीं होगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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