मंत्रिमंडल को एस बैंड स्पेक्ट्रम आवंटन की जानकारी नहीं थी : प्रधानमंत्री

Manmohan Singh
नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार को कहा कि मंत्रिमंडल को वर्ष 2005 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) की वाणिज्यिक इकाई एंट्रिक्स और देवास के बीच हुए समझौते में निजी कम्पनी को महंगे और दुर्लभ एस-बैंड स्पेक्ट्रम का आवंटन शामिल होने की जानकारी नहीं थी।

राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा कि एंट्रिक्स और देवास के बीच दो उपग्रहों के प्रक्षेपण को लेकर हुए समझौते पर मंत्रिमंडल को भेजे गए नोट में विशेष प्रतिबद्धता (स्पेक्ट्रम के लिए) का उल्लेख नहीं था। प्रधानमंत्री ने कहा कि दो उपग्रहों के प्रक्षेपण की मंजूरी देने के कारण मंत्रिमंडल की भूमिका इस मामले में अप्रत्यक्ष रही है। उन्होंने कहा, "मंत्रिमंडलीय नोट में इस बात का उल्लेख नहीं था कि देवास और एंट्रिक्स के बीच कोई विशेष प्रतिबद्धता हुई है।"

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद प्रकाश जावडेकर द्वारा इस समझौते के सम्बंध में प्रधानमंत्री कार्यालय की मंजूरी के लिए फाइल और उसके जवाब के सम्बंध में सवाल पूछे जाने पर प्रधानमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री कार्यालय द्वार इस समझौते को मंजूरी दिए जाने का कोई सवाल नहीं उठता।

इससे पहले मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की सांसद टी. एन. सीमा के सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री वी. नारायणसामी ने कहा कि एंट्रिक्स और देवास के बीच यह समझौता 2005 में हुआ था लेकिन जुलाई 2010 में इसे रद्द करने का फैसला ले लिया गया था क्योंकि एस-बैंड स्पेक्ट्रम की जरूरत रक्षा और सामाजिक क्षेत्रों के लिए है।

नारायणसामी ने कहा, "अंतरिक्ष आयोग ने यह (रद्द करने का) फैसला लिया था। इस निर्णय को सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति के पास भेजा गया जिसने इसे मंजूर किया।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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