मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों तक पहुंची जनगणना
अनिल गुलाटी
छिंदवाड़ा, 22 फरवरी (आईएएनएस)। जनगणना को लेकर लोगों में जागरूकता आ रही है और वे इसका महत्व भी समझने लगे हैं। मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में जनगणना अधिकारी को भी अब इसमें कोई खास मुश्किल नहीं पेश आ रही है। उन्हें पहले ही इसके लिए प्रशिक्षित किया जा चुका है और अब लोग भी उन्हें आसानी से जानकारी मुहैया करा रहे हैं।
तामिया की एक शिक्षिका रंजना सोनी के अनुसार इस तरह एकत्र की जाने वाली जानकारी से सरकार को जनता के हित में योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी। इसलिए वह जनगणना करने वाले को अपनी और परिवार से सम्बंधित सभी जानकारी बेहिचक मुहैया कराती है। जनगणना के दूसरे दौर के बारे में वह कहती हैं, "साहू साहब आए थे। फॉर्म में सब जानकारी ले गए।" वह दूसरी बार उनके घर आए थे। कुछ महीने पहले भी वह आए थे।
बहेरिया जनजाति की एक महिला को हालांकि जनगणना के बारे में कोई बहुत जानकारी नहीं है। वह केवल इतना जानती है कि कुछ लोग उसके और परिवार के बारे में पूछने आए थे, जिनके सवालों के जवाब उसने दिए थे।
तामिया और पटालकोट छिंदवाड़ा जिले में आता है। तामिया जहां तहसील है और खड़ी चढ़ाई वाला पहाड़ी इलाका है, वहीं पटालकोट तामिया तहसील का एक हिस्सा है, जिसकी घाटी में 12 गांव और 13 टोले बसे हैं। अब भी इस गांव का संपर्क सड़क से नहीं है। पटालकोट में कुछ घरों ने आपस में क्लब बनाया है, जिसके माध्यम से उनकी वित्तीय जरूरतें पूरी होती हैं। यह करीब 79 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला है और यहां की बहुसंख्यक आबादी गोंड और बहेरिया जनजाति की है।
इन गांवों तक पहुंचने के लिए लोगों को पैदल ही पथरीले रास्तों पर चलना पड़ता है, जिसे स्थानीय निवासी 'शॉर्ट कट' कहते हैं। बारिश के दिनों में आवागमन बेहद मुश्किल हो जाता है। रास्ते में सीढ़ियां भी बनाई गई हैं, लेकिन वे काफी ऊंची हैं।
इन मुश्किलों के बावजूद जनगणना अधिकारी दूर दराज के इन गांवों में पहुंच रहे हैं और लोगों से जानकारी जुटा रहे हैं। ऐसे ही एक जनगणना अधिकारी हैं राज कुमारी भारती, जो सुबह-सुबह गांव पहुंच जाते हैं और लोगों से उनके बारे में जानकारी जुटाते हैं। वह उसी गांव में स्कूल शिक्षक हैं।
राज कुमार स्कूल जाने से पहले एक दिन में सामान्यत: 10-12 घरों में जाकर लोगों से पूछताछ कर आते हैं और फिर स्कूल के लिए रवाना होते हैं। उनके साथ-साथ चार लोगों को पूरे क्षेत्र में जनगणना की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें जनगणना के दूसरे दौर के लिए तीन दिन का प्रशिक्षण दिया गया है कि कैसे लोगों से सवाल-जवाब करने हैं और उसके आधार पर फार्म भरने हैं। उन्हें सवाल-जवाब की एक पुस्तिका भी दी गई है।
राजकुमार के अनुसार, 'जनगणना कोई जानी-समझी चीज नहीं है। यह 10 साल में एक बार होता है और इसका तुरंत फायदा भी लोगों को नहीं मिलता। लोगों के मन में सवाल और उसके जवाब को लेकर तमाम तरह की आशंकाएं होती हैं। उन्हें समझाना पड़ता है कि आखिर हम क्यों उनसे सूचनाएं मांग रहे हैं।
हम उन्हें बताते हैं कि ये सूचनाएं सरकार को भेजी जाएंगी, ताकि उसके आधार पर सरकार आमजन के हित में योजनाएं बनाए। इसका फायदा अंतत: उन्हें ही होगा। पूरी तरह आश्वत होने के बाद ही वे हमारे सवालों का जवाब देते हैं। सालों से गांव में रहने का फायदा यहां हमें मिलता है और हमारे लिए उन्हें आश्वस्त करना आसान होता है।'
मध्य प्रदेश में जनगणना अधिकारी सचिन सिन्हा ने कहा, 'यह दूसरे चरण की जनगणना है, जो 9 फरवरी को शुरू हुई थी और 28 फरवरी तक पूरे देश में किया जाना है। तमाम मुश्किलों के बावजूद मध्य प्रदेश में हम हर घर में पहुचंने और उनके बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास कर रहे हैं।'
मध्य प्रदेश में जनगणना सम्बंधी कार्यो के निष्पादन में सहयोग दे रही यूनीसेफ के राज्य प्रमुख डॉ. तानिया गोल्डनर ने कहा, 'हम इसे बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं। इससे लोगों के बारे में न केवल विश्वसनीय आंकड़े मिल रहे हैं, बल्कि यह सामाजिक विकास और लोगों के हित में योजनाओं के निर्माण में भी बेहद अहम साबित होगा।'
जनगणना का पहला चरण, जिसमें घरों की गणना की गई थी, पिछले साल अप्रैल से सितम्बर के बीच सम्पन्न हुआ था। यह भारत की 15वीं जनगणना है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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