लीबिया: गद्दाफ़ी पर बढ़ रहा है दबाव

लीबिया: गद्दाफ़ी पर बढ़ रहा है दबाव

लीबिया का दूसरा बड़ा शहर बेनग़ाज़ी विपक्ष के हाथों में चला गया है.

लीबिया में कर्नल गद्दाफ़ी की सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है और अब देश के वरिष्ठ राजनयिकों ने भी आंदोलनों में शामिल होने की घोषणा कर दी है.

लीबिया के कई वरिष्ठ राजनयिकों ने कर्नल गद्दाफ़ी की सरकार का विरोध करते हुए इस्तीफ़ा दे दिया है.

भारत में लीबिया के राजदूत अली अल-इस्सावी ने बीबीसी से बातचीत में प्रदर्शनकारियों को लेकर लीबिया की सरकार के कड़े रुख पर एतराज़ जताया.

उन्होंने कहा, ''सरकार ने लीबिया के नागरिकों को रोकने के लिए किराये के सैनिकों का इस्तेमाल भी किया.''

काहिरा स्थित अरब लीग में लीबिया के राजदूत अब्दल मोनीम अल-होनी ने भी पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वो इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं.

खबरों के अनुसार चीन में लीबिया के राजदूत ने भी इस्तीफ़ा दे दिया है.

इससे पहले कर्नल गद्दाफ़ी के बेटे सैफ़ अल इस्लाम गद्दाफ़ी ने लीबिया के सरकारी टीवी पर देश को संबोधित करते हुए स्वीकार किया था कि लीबिया का दूसरा बड़ा शहर बेनग़ाज़ी विपक्ष के हाथों में चला गया है.

उन्होंने कहा कि देश के तीसरे सबसे बड़े शहर बीईदा को मुस्लिम विद्रोहियों ने इस्लामी रियासत घोषित कर दिया है जिन्हें पहले आम माफ़ी दी गई थी.

सैफ़ अल इस्लाम गद्दाफ़ी ने चेतावनी दी है कि यदि ये परिस्थितयाँ जारी रहीं तो देश में गृह युद्ध, विभाजन और हिंसक संघर्ष होगा जो लीबिया को ग़रीबी और भुखमरी की ओर धकेल देगा.

उन्होंने कहा कि इस स्थिति से बचने का रास्ता है बातचीत शुरू करना और एक नए संविधान और सुधारों की तरफ़ तेज़ गति से बढ़ना.

उधर संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा है कि वो लीबिया में के दुखद हालात के बारे में वहाँ के नेतृत्व के साथ बातचीत करेंगे.

बान की मून ने कहा कि वो बहरीन के शाह से भी बातचीत कर चुके हैं. बहरीन में भी सुरक्षा बलों की गोलीबारी में अनेक प्रदर्शनकारी हताहत हुए है.

बान की मून ने बहरीन सरकार से अनुरोध किया कि वो संयम से काम लें और प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग ना करें. बान की मून ने विपक्ष के साथ बातचीत करने के शाह फ़ैसले का स्वागत किया है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के एक प्रवक्ता ने कहा कि मिस्र में एक दल भी भेजा जा रहा है जो अनेक लोगों से मुलाक़ात करेगा जिनमें सत्तारूढ़ सैन्य परिषद भी होगी. राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के हटने के बाद के राजनीतिक माहौल को समझने और नए हालात में लोकतंत्र स्थापना में संयुक्त राष्ट्र की मदद देने पर विचार किया जाएगा.

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