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राष्ट्रपति ने गिनाईं सरकार की प्राथमिकताएं (राउंडअप)

भ्रष्टाचार और महंगाई के साथ विदेशों में जमा काले धन के मुद्दे पर उन्होंने चिंता जताई। गरीबों के लिए चलाई जा रही योजनाओं के उन तक न पहुंच पाने को लेकर गम्भीर राष्ट्रपति ने आर्थिक सुधारों की गति बनाए रखने एवं देश में अधिक निवेश प्रोत्साहित करने की जरूरत पर बल दिया।

महंगाई पर काबू पाना प्राथमिकता :

राष्ट्रपति ने कहा कि देश के सामने महंगाई एक बड़ी समस्या है और सरकार इसे प्राथमिता से निपटेगी। उन्होंने कहा, "मुद्रास्फीति की समस्या और वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों और कश्मीर घाटी में हिंसा चिंता का विषय रहा है।"

उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति विशेषकर बढ़ते खाद्य मूल्यों पर काबू पाने और सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार कदम उठाने को प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि गरीबों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का समुचित लाभ उन तक नहीं पहुंचना भी चिंता का विषय है।

काले धन के मुद्दे से निपटा जाएगा :

राष्ट्रपति ने कहा कि केंद्र सरकार काले धन के कुप्रभाव को लेकर चिंतित है और वह इस समस्या से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है। "हाल के दिनों में काले धन के मुद्दे ने काफी ध्यान खींचा है, खासतौर से विदेशी बैंकों में कथितरूप से जमा धन ने। सरकार काले धन के कुप्रभाव को लेकर उपजी चिंता में पूरी तरह सहभागी है, चाहे वह काला धन आयकर चोरी के जरिए पैदा हुआ हो या अवैध गतिविधियों के जरिए।"

उन्होंने कहा, "इसके लिए सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों (राज्य सरकारों की भी) को सतत प्रयास करने की जरूरत है। सरकार ने कानूनी ढाचे को मजबूत करने, नए संस्थानों को स्थापित करने और इस समस्या से निपटने के लिए क्षमता बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं।"

राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर इस समस्या के असर का परीक्षण करने के लिए तथा इस समस्या से निपटने के लिए एक उचित ढाचा सुझाने हेतु एक बहुविधि अध्ययन शुरू किया गया है।

पाटील ने कहा, "सरकार, इस तरह के धन की पहचान करने और उसे वापस लाने की प्रक्रिया को गति देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय, खासतौर से जी-20 के साथ मिलकर काम कर रही है।"

पाटील ने कहा कि भारत आर्थिक धोखाधड़ी और कर चोरी विरोधी अपने उपायों के कारण अब वित्तीय कार्य बल का भी एक सदस्य है।

पाटील ने कहा, "भारत ने यूरेशियन समूह और वित्तीय ईमानदारी एवं आर्थिक विकास पर कार्य दल की भी सदस्यता हासिल कर ली है। सरकार ने उन देशों के साथ कर उद्देश्यों के लिए सूचना का आदान-प्रदान करने हेतु कदम उठाया है, जहां भारतीय नागरिकों का धन जमा हो सकता है।"

पाटील ने कहा कि शुरुआती परिणाम उत्साहवर्धक हैं। उन्होंने कहा, "इन कदमों के जरिए 34,601 करोड़ रुपये कर की अतिरिक्त उगाही हुई है और 48,784 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय पकड़ में आई है। सरकार भारत से सम्बंधित किसी भी पूंजी को वापस लाने तथा दोषियों को कानून के कटघरे में खड़ा करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगी।"

आधारभूत संरचना का विकास सर्वोच्च प्राथमिकता :

राष्ट्रपति का कहना है कि देश का सामाजिक और आर्थिक विकास इस बात पर निर्भर करता है कि आधारभूत संरचनाओं का विकास कितना जल्द किया जाता है। सरकार ने 2012 में समाप्त होने वाली 11वीं पंचवर्षीय योजना में आधारभूत संरचनाओं को सर्वोच्च वरीयता देते हुए इस मद में 20 लाख करोड़ रुपये दिए हैं। अगली पंचवर्षीय योजना में इस राशि को दोगुना कर दिया जाएगा।

पाटील ने कहा कि आधारभूत संरचना विकास के लिए जरूरी तत्व है। सरकार अकेले इस क्षेत्र में विशाल निवेश नहीं कर सकती। इसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी भी जरूरी है। पिछले साल आधारभूत संरचनाओं में हुए कुल निवेश में 34 फीसदी हिस्सेदारी निजी क्षेत्र की थी।

उन्होंने कहा कि दूरसंचार क्षेत्र ने 80 करोड़ उपभोक्ताओं के साथ काफी अच्छा विकास किया है। अब दूरसंचार और इंटरनेट सेवाओं को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाया जाएगा।

पाटील ने कहा कि सरकार ने एक लाख से अधिक आबादी वाले सभी शहरों में एफएम रेडियो सेवा का प्रसार करने का प्रस्ताव रखा है। देश के 283 शहरों में कुल 806 एफएम रेडिया चैनल खोलने का प्रस्ताव है।

उन्होंने कहा कि बिजली क्षेत्र के विकास के लिए सरकार कोयले का उत्पादन बढ़ाने की भी कोशिश कर रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार राजमागोर्ं के निर्माण पर भी ध्यान दे रही है और 16,000 किलोमीटर सड़क का निर्माण जारी है।

इसके साथ ही राष्ट्रपति ने कहा कि यह आत्मसंतुष्ट होने का समय नहीं है। सरकार को देश में ऐसे माहौल बनाने की जरूरत है, जिसमें घरेलू और विदेशी निवेश खास कर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश अधिक-से-अधिक हो सके।

खाद्य सुरक्षा विधेयक पर राज्यों से परामर्श:

राष्ट्रपति ने कहा कि प्रास्तावित खाद्य सुरक्षा विधेयक पर राज्यों से परामर्श लिया जा रहा है, क्योंकि जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) में सुधारों को लेकर राज्यों की प्रतिबद्धता पर इसकी सफलता निर्भर करेगी।

उन्होंने कहा, "मैंने पहले ही घोषणा की थी कि मेरी सरकार खाद्य सुरक्षा कानून को लेकर प्रतिबद्ध है और इसके तहत गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों को रियायती दर पर खाद्यान्न मुहैया कराएगी।"

पाटील ने कहा, "राष्ट्रीय सलाहकार परिषद से इस सम्बंध में महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुई हैं। इस मसले पर राज्यों से सलाह ली जा रही है और पीडीएस में सुधारों को लेकर राज्यों की प्रतिबद्धता पर ही इसकी सफलता निर्भर करेगी।"

राष्ट्रपति पाटील ने कहा कि महंगाई दर से निपटने के लिए उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि करना ही इस दीर्घकालिक उपाय है और इसके लिए सरकार द्वारा किसानों को प्रोत्साहित किया गया है।

पाटील ने कहा कि सरकार ने छह वर्षो में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य को 550 रुपये से बढ़ाकर 1,000 प्रति क्विंटल तथा गेहूं का समर्थन मूल्य 630 रुपये से बढ़ाकर 1,100 रुपये कर दिया है।

उन्होंने कहा कि गन्ने के समर्थन मूल्य में 50 फीसदी से अधिक का इजाफा किया गया है और खादों पर सब्सिडी दी जा रही है।

सुधारों की गति बनाए रखनी है :

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने सुधारों की गति बनाए रखने एवं देश में अधिक निवेश प्रोत्साहित करने की जरूरत पर बल देते हुए कहा, "हमें एक व्यापक मोर्चे पर सुधारों के लिए गति बनाए रखनी है।"

पाटील ने विपरीत वैश्विक वातावरण के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था को उच्च वृद्धि के पथ पर ले जाने के लिए सरकार की पीठ थपथपाई।

पाटील ने कहा, "ढिलाई बरतने की हालांकि बिल्कुल जरूरत नहीं है। हमें निवेश के लिए घरेलू वातावरण को और उपयुक्त बनाने के लिए, सार्वजनिक व निजी निवेश तथा घरेलू व विदेशी निवेश, खासतौर से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कोशिश करते रहनी है।"

बातचीत के लिए पाकिस्तान को आतंकवाद बंद करना होगा :

राष्ट्रपति ने कहा कि पाकिस्तान आतंकी गतिविधियों के लिए अपनी धरती का इस्तेमाल करने की अनुमति देना बंद कर दे, तो भारत उसके साथ अर्थपूर्ण बातचीत करने के लिए तैयार है।

पाटील ने कहा, "हम पाकिस्तान के साथ अर्थपूर्ण बातचीत के जरिए सभी मुद्दों का एक शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं, बशर्ते कि वह आतंकी गतिविधियों के लिए अपनी धरती का इस्तेमाल किए जाने की अनुमति देना बंद कर दे।"

ज्ञात हो कि भारत और पाकिस्तान हाल ही में विभिन्न क्षेत्रों में बातचीत बहाल करने के लिए राजी हुए हैं। इसके पहले दोनों देशों के विदेश सचिवों ने इसी महीने थिम्पू में सम्पन्न हुए दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) की बैठक के इतर मौके पर मुलाकात की थी।

दोनों देशों के बीच विदेश मंत्री स्तर की बातचीत जुलाई में नई दिल्ली में होगी। इस बैठक में आतंकवाद से मुकाबला व पानी के मुद्दे सहित विभिन्न मोर्चो पर हुई चर्चाओं में प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

विकास एवं पर्यावरण के बीच संतुलन जरूरी :

राष्ट्रपति ने विकास सम्बंधी जरूरतों और पर्यावरण सम्बंधी चिंताओं के बीच एक उचित संतुलन स्थापित करने का तरीका हर हाल में तलाशे जाने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, "सरकार पर्यावरण एवं वन संरक्षण से सम्बंधित सभी कानूनों को लागू करने को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। आर्थिक वृद्धि की तीव्र रफ्तार नई चुनौतियां पैदा कर रही है और हमारे जैसे किसी विकासशील देश को पर्यावरणीय अनिवार्यताओं और विकास सम्बंधी जरूरतों के बीच एक उचित संतुलन स्थापित करने के लिए हर हाल में रास्ते तलाशने होंगे।"

पाटील ने कहा कि सरकार ने विभिन्न तरह की विकास सम्बंधी गतिविधियों से पैदा हो रही पर्यावरण सम्बंधी चिंताओं को दूर करने सम्बंधी सभी मुद्दों से निपटने के लिए एक मंत्री समूह (जीओएम) का गठन किया है।

पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन करने वाली कई अधोसंरचना परियोजनाओं को रोक दिया है। इस कारण उन्हें कई मंत्रालयों के साथ जूझना पड़ रहा है।

पाटील ने कहा कि नदियों का संरक्षण केंद्र एवं राज्य सरकारों की सामूहिक व सतत जारी रहने वाली जिम्मेदारी है। राष्ट्रपति ने कहा, "राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण के तहत सरकार द्वारा कई कदम उठाए गए हैं। देश के सात भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) का एक संघ गंगा नदी के लिए बेसिन प्रबंधन योजना तैयार कर रहा है।"

पाटील ने कहा कि सरकार ने पर्यावरण संरक्षण एवं वन संरक्षण तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों सम्बंधी मामलों के प्रभावी एवं जल्द निपटारे के लिए एक राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण स्थापित किया है।

पाटील ने कहा कि टिकाऊ आर्थिक वृद्धि के लिए उच्च दर्जे की वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी क्षमता जरूरी है। उन्होंने कहा, "तारापुर में दूसरे विद्युत रिएक्टर प्रसंस्करण संयंत्र के शुरू हो जाने से त्रिस्तरीय घरेलू परमाणु कार्यक्रम में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल हुई थी।"

पाटील ने कहा कि खाद्य सुरक्षा के लिए प्रयास बढ़ाने, औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने तथा जैव प्रौद्योगिकी में नवाचार के लिए एक जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद की स्थापना की जाएगी।

संसद के मौजूदा सत्र में भारतीय जैव प्रौद्योगिकी विनियामक प्राधिकरण विधेयक पेश किया जाना प्रस्तावित है।

पाटील ने कहा, "देश में जल संसाधनों के प्रबंधन ने एक बड़ी चनौती खड़ी की है। जल प्रबंधन में लोगों की भागीदारी सुनिश्चित कराने और लोगों में जागरुकता पैदा करने पर जोर दिया जाएगा। इसके अलावा जल प्रबंधन एवं संरक्षण के लिए एक एकीकृत नदी बेसिन दृष्टिकोण, सतह एवं भूमिगत जल को साफ करने, आधुनिक प्रौद्योगिकी उपकरणों के उपयोग जैसे उपायों को अपनाया जाएगा।"

चुनावों के लिए सरकारी कोष पर विचार जारी :

राष्ट्रपति ने कहा कि चुनावी सुधारों की प्रक्रिया को गति देने के लिए सरकार ने एक समिति गठित की है और एक मंत्री समूह (जीओएम) चुनावों के लिए सरकारी कोष मुहैया कराने सम्बंधी मुद्दों पर विचार कर रहा है।

"मुझे भरोसा है कि सभी राजनीतिक पार्टियां इन सुधारों को लाए जाने की आवश्यकता का समर्थन करती है।"

पाटील ने कहा कि मंत्री समूह चुनावों के लिए सरकारी कोष मुहैया कराए जाने सम्बंधी मुद्दे पर विचार करेगा और उम्मीद है कि जल्द ही वह अपनी रिपोर्ट सौंप देगा। भ्रष्टाचार पर गठित वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता वाला मंत्री समूह चुनावों के लिए सरकारी कोष सम्बंधी मुद्दों पर विचार कर रहा है।

गूंजा जय तेलंगाना :

अभिभाषण के दौरान कांग्रेस के लिए उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई जब आंध्र प्रदेश के तेलंगाना क्षेत्र के कांग्रेसी सांसदों ने पृथक तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर 'जय तेलंगाना' के नारे लगाए और तख्तियां लहराईं।

इस दौरान लगभग एक दर्जन सांसद अपनी सीटों से उठ खड़े हुए और उन्होंने नारेबाजी की। पाटील के 45 मिनट के संयुक्त सम्बोधन अभी समाप्त होने ही वाला था कि कुछ कांग्रेसी सांसदों ने तेलंगाना के समर्थन में तख्तियां लहराईं और 'जय तेलंगाना" और "वी वांट तेलंगाना" के नारे लगाए।

राष्ट्रपति का भाषण समाप्त होने के साथ ही ये सांसद वापस अपनी सीटों पर बैठ गए। लेकिन जब राष्ट्रपति संसद के केंद्रीय कक्ष से बाहर जा रही थीं, तब भी सांसदों ने तेलंगाना के समर्थन में तख्तियां लहराईं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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