बहरीन की राजधानी में जमे हैं प्रदर्शनकारी
मनामा, 21 फरवरी (आईएएनएस)। बहरीन में सरकार विरोधी प्रदर्शन में शामिल प्रदर्शनकारी राजधानी मनामा में पिछले नौ दिनों से पर्ल चौराहे पर लगातार डेरा जमाए हुए हैं। एक प्र्दशनकारी ने सोमवार को कहा, "बहरीन का कोई भी नागरिक बहरीन की मौजूदा सरकार को नहीं चाहता।"
बहरीन में 14 फरवरी से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन में अब तक कम से कम छह व्यक्ति मारे गए हैं और कई सारे घायल हुए हैं।
कतर के टीवी चैनल अल जजीरा ने कहा है कि पर्ल स्क्वे यर पर सैकड़ों प्रदर्शनकारी जमे हुए हैं। पर्ल स्क्वे यर पिछले नौ दिनों से जारी विरोध प्रदर्शन का केंद्र बना हुआ है।
90 मीटर का यह स्मारक धीरे-धीरे तंबुओं से पट गया है। वहां अस्थायी रसोइयां स्थापित की गई हैं, जो लोगों को भोजन मुहैया करा रही हैं।
अल जजीरा ने पिछले दो दिनों से यहां जमे प्रदर्शनकारी, हुसैन कासर के हवाले से कहा है, "मैं खुश हूं। लेकिन बहरीन का कोई भी नागरिक बहरीन की सरकार को नहीं चाहता।"
ज्ञात हो कि बहरीन का विद्रोह ट्यूनीशिया एवं मिस्र में हुई सफल क्रांतियों से प्रेरित है। ट्यूनिशिया में एक महीने तक अशांति का दौर चला था और उसके बाद राष्ट्रपति जिने अल-अबीदीन बेन अली के शासन का 14 जनवरी को अंत हो गया था। उसके कुछ दिनों बाद 25 जनवरी को मिस्र में विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ और राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक ने 11 फरवरी को इस्तीफा दे दिया।
ट्यूनीशिया और मिस्र के जनांदोलनों का परिणाम यह है कि अल्जीरिया, जोर्डन, सीरिया और ईरान में भी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।
बहरीन, खाड़ी क्षेत्र का सबसे छोटा देश है, जहां अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा तैनात है।
बीबीसी ने कहा है कि सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि पहले उनकी मांगें पूरी की जाएं, उसके बाद वे तानाशाही के साथ बातचीत करेंगे। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि सरकार इस्तीफा दे दे, राजनीतिक कैदियों को रिहा कर दिया जाए और प्रदर्शनकारियों की मौतों की जांच कराई जाए।
शाहजादे शेख सलमान बिन हमद अल-खलीफा ने रविवार को सीएनएन से कहा था कि प्रदर्शनकारियों को पर्ल स्क्वे यर इलाके में बने रहने की पूरी छूट होगी। उन्होंने प्रस्तावित बातचीत के बारे में कहा, "देश की सभी राजनीतिक पार्टियों को बातचीत की मेज पर बोलने का हक है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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