मृत्युदंड बरकरार रखने पर मुस्कुरा रहा था कसाब (लीड-2)

कसाब आर्थर रोड केंद्रीय जेल की अपनी कोठरी से वीडियो-कांफ्रेंसिंग के जरिए सोमवार सुबह 11 बजे के करीब न्यायमूर्ति रंजना देसाई और न्यायामूर्ति आर.वी. मोरे की खंडपीठ के सामने उपस्थित हुआ था।

जब अदालत ने कसाब के वकील की विशेष न्यायाधीश एम.एल. तहालियानी की विशेष अदालत द्वारा मई 2010 में दिए गए मृत्युदंड के आदेश को चुनौति देने वाली याचिका खारिज कर दी तो कसाब लापरवाही के साथ चल रहा था और कैमरे के सामने देखकर मुस्कुरा रहा था।

खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा, "यह जघन्य अपराध का मामला है। यदि उसे मृत्युदंड नहीं दिया जाता है तो लोगों का न्याय प्रणाली पर से विश्वास उठ सकता है।"

उच्च न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा कसाब पर लगाए गए चारों अभियोगों को बरकरार रखा है। इनमें मुम्बई के तीन शीर्ष पुलिस अधिकारियों, आतंकवाद निरोधी दस्ते के पूर्व प्रमुख हेमंत करकरे, मुठभेड़ विशेषज्ञ विजय सालस्कर और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अशोक कामटे की हत्या का अपराध शामिल है।

कसाब व नौ अन्य पाकिस्तानी आतंकवादियों ने 26-29 नवंबर, 2008 को मुम्बई हमले को अंजाम दिया था। इसमें कुल 166 लोग मारे गए थे।

सुरक्षा बलों द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में कसाब अकेला ही जीवित बचा था जबकि उसके सभी नौ साथी मारे गए थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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