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बंधक संकट : नहीं बनी बात, सोमवार को होगी वार्ता (राउंडअप इंट्रो-1)

भुवनेश्वर, 20 फरवरी (आईएएनएस)। उड़ीसा के मलकानगिरी जिले से अगवा जिलाधिकारी और जूनियर इंजीनियर की रिहाई के लिए राज्य सरकार द्वारा मध्यस्थों के साथ शुरू की गई वार्ता रविवार को बेनतीजा रही। सरकार मध्यस्थों के साथ अपनी बातचीत सोमवार को जारी रखेगी।

जिलाधिकारी आर. विनील कृष्णा और जूनियर इंजीनियर पवित्र मोहन माझी की रिहाई के लिए नक्सलियों पर दबाव बनाने के लिए सरकारी कर्मचारियों, छात्रों और समाज के अन्य लोगों ने राज्य भर में रैलियां निकालीं।

मध्यस्थता के लिए नक्सलियों ने तीन नाम सुझाए हैं। इनमें दंदापनी मोहंती, मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं शिक्षाविद जी. हरगोपाल और आर. सोमेश्वर राव शामिल हैं। इन तीनों व्यक्तियों ने राज्य के गृह सचिव यू.एन. बेहरा और पंचायती राज सचिव एस.एन. त्रिपाठी के साथ लम्बी वार्ता की।

बेहरा ने एक बयान पढ़ते हुए कहा, "इस बीच इस बात पर सहमति बनी है कि जब तक कि बातचीत की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती तब तक कोई नक्सली विरोधी अभियान नहीं चलेगा। साथ ही नक्सली शांति प्रकिया पर प्रतिकूल असर डालने वाला कोई कदम नहीं उठाएंगे।"

उन्होंने कहा, "जनता के लिए असुविधा पैदा करने के लिए राज्य में कहीं भी सड़क मार्ग अवरुद्ध नहीं होना चाहिए। मध्यस्थों ने इस बात का भरोसा दिया है कि जिलाधिकारी और जूनियर इंजीनियर को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।"

तीनों मध्यस्थ हालांकि संवाददाता सम्मेलन में मौजूद थे लेकिन उन्होंने प्रश्नों के जवाब देने से इंकार किया।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि बेहरा और त्रिपाठी ने राज्य अतिथि गृह में मध्यस्थों से बातचीत शुरू की। इनमें से दो मध्यस्थ रविवार सुबह हैदराबाद से यहां पहुंचे।

वार्ता शुरू होने से पहले ककातिया विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर हरगोपाल ने पत्रकारों से कहा, "हम केवल मध्यस्थ हैं। सरकार पर किसी तरह का दबाव डालने का कोई सवाल ही नहीं है।"

उल्लेखनीय है कि नक्सलियों ने मलकानगिरी के जिलाधिकारी आर. विनील कृष्णा और जूनियर इंजीनियर पवित्र मोहन माझी को गत बुधवार शाम को अगवा कर लिया था।

नक्सलियों ने बंधकों की सुरक्षित रिहाई के लिए सरकार के पास अपने मांगों की सूची भेजी है। उनकी मांगों में राज्य में उनके खिलाफ सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे अभियानों को रोकने, सभी राजनीतिक कैदियों की रिहाई, बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के साथ करारों को रद्द करने और पुलिस हिरासत में मारे गए नक्सलियों के साथ सहानुभूति रखने वाले लोगों के परिवार को मुआवजा देना शामिल है।

सूत्रों ने बताया कि उनकी मांगों पर झुकते हुए सरकार कई जेलों में बंद नक्सली नेताओं के ऊपर लगे आरोपों की समीक्षा करने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है।

नक्सलियों के साथ वार्ता प्रक्रिया शुरू करने के लिए सरकार अपने वकीलों को यह कह सकती है कि वे नक्सलियों की रिहाई के लिए उनके वकीलों द्वारा दायर याचिका पर आपत्ति न उठाएं।

सूत्रों ने बताया कि सरकार द्वारा नक्सली विचारक गांती प्रसादम को रिहा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार यह कदम मध्यस्थता करने वालों के सुझाव पर उठा रही है। मध्यस्थों का कहना है कि प्रसादम की रिहाई से बातचीत की प्रक्रिया जोर पकड़ेगी। अधिकारियों ने हालांकि इस मसले पर टिप्पणी करने से इंकार किया है।

दिल्ली से एक स्थानीय टेलीविजन को दिए साक्षात्कार में हरगोपाल ने कहा, "मैं प्रसादम की रिहाई के लिए उड़ीसा सरकार से अनुरोध करता हूं।"

उन्होंने कहा, "उसके बाहर आने पर शायद मैं और आर.एस. राव मामले में हस्तक्षेप करने का प्रयास करेंगे। प्रसादम भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

की ओर से नक्सलियों से बात कर सकता है। हम सम्भवत: कोई हल निकाल सकते हैं।"

सूत्रों के मुताबिक आंध्र प्रदेश की जेल में बंद प्रसादम को राज्य पुलिस शनिवार रात ही यहां ला चुकी है।

राज्य के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए आईएएनएस को बताया, "प्रसादम को कोरापुत जेल में रखा गया है।"

उन्होंने कह कि प्रसादम के वकील ने शनिवार को एक स्थानीय अदालत में जमानत के लिए आवेदन किया था जिसे खारिज कर दिया गया। उसकी जमानत के लिए सोमवार को एक बार फिर जमानत याचिका पेश की जा सकती है।

नक्सलियों ने राज्य के जेलों में बंद अपने साथियों की रिहाई की भी मांग की है। इनमें से कम से कम सात कट्टर नक्सली हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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