संयुक्त राष्ट्र में सुधार के लिए मार्च में होगी वार्ता
नई दिल्ली, 20 फरवरी (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए विभिन्न सरकारों के बीच बातचीत का अगला दौर मार्च के पहले सप्ताह में शुरू होगा। भारत सुरक्षा परिषद की सदस्यता का एक प्रबल दावेदार है।
अंतर-सरकारी वार्ता के अध्यक्ष जहीर तनीन ने कहा कि बातचीत एक छोटी प्रकाशित सामग्री पर आधारित होगी, जिसमें 192 सदस्य देशों की राय शामिल है।
संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि तनीन ने कहा कि इस वार्ता में प्रमुख बात यह निकल कर आने वाली है कि सभी देश संयुक्त राष्ट्र के लिए एक अधिक प्रतिनिधित्व वाले और लोकतांत्रिक संस्था चाहते हैं।
तनीन नई दिल्ली में सबसे कम विकसित देशों (एलडीसी) के सम्मेलन में हिस्सा लेने आए थे। एलडीसी दुनिया के 48 सबसे पिछड़े देशों का समूह है। उन्होंने हालांकि कहा कि अंतर्राष्ट्रीय शासन और शक्ति संतुलन से जुड़े होने के कारण यह वार्ता पेचीदी होगी।
उन्होंने कहा कि सदस्य देश चाहते हैं कि सुरक्षा परिषद में उन देशों को भी शामिल किया जाए, जिनकी अब तक उपेक्षा की जाती रही है।
तनीन ने आइएएनएस से कहा कि अब हम साम्राज्यवाद, शीत-युद्ध और 9/11 से आगे बढ़ चुके हैं। इसे देखते हुए एक सक्षम, लोकतांत्रिक, प्रासंगिक और न्यायोचित निकाय बनाने के लिए बातचीत की जाएगी।
उन्होंने कहा कि हर देशों की राय को एक साथ रख पाना कठिन है, लेकिन उनकी राय को 37 पृष्ठ के एक दस्तावेज में शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि इस दस्तावेज की सभी महत्वपूर्ण बातों को निकालकर तीन पृष्ठ का एक संक्षिप्त दस्तावेज का निर्माण किया गया है।
सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य हैं। पांच स्थायी सदस्यों के पास वीटो का अधिकार है, जबकि दस सदस्यों का चुनाव क्षेत्रीय आधार पर दो-दो सालों के लिए होता है।
सुरक्षा परिषद का विस्तार इससे पहले 1965 में किया गया था, जब अस्थायी सदस्यों की संख्या को छह से बढ़ाकर 10 की गई थी।
जी-4 समूह के देश भारत, जापान, ब्राजील और जर्मनी विस्तारित सुरक्षा परिषद की सदस्यता के लिए प्रबल दावेदारी पेश कर रहे हैं।
आगामी वार्ता में सुरक्षा परिषद के स्थायी और अस्थायी सदस्यों की संख्या में विस्तार, वीटो अधिकार, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, आम सभा और सुरक्षा परिषद के सम्बंधों पर बात की जा सकती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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