उड़ीसा: मध्यस्थों का सुरक्षा का आश्वासन

संदीप साहू
भुवनेश्वर से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
मलकानगिरी के जिलाधिकारी विनील कृष्ण का माओवादियों ने अपहरण कर लिया था
माओवादियों की पकड़ से छुड़वाने के लिए उड़ीसा सरकार से बात करे मध्यस्थों ने सरकार को आश्वासन दिया है कि दोनों अधिकारियों को कोई नुक़सान नहीं होने दिया जाएगा.
उल्लेखनीय है कि बुधवार को इन अधिकारियों को माओवादियों ने अगवा कर लिया था
मध्यस्थों के माध्यम से इन दोनों अधिकारियों की रिहाई की बात चल रही है.
उड़ीसा के गृह सचिव यूएन बेहरा ने मध्यस्थों से रविवार को लंबी बातचीत के बाद कहा, ''मध्यस्थों ने आश्वासन दिया है कि मलकानगिरी के जिलाधिकारी आर विनील कृष्णा और जूनियर इंजीनियर पवित्र मोहन मांझी को कोई नुक़सान नहीं होने दिया जाएगा.''
माओवादियों ने प्रोफ़ेसर आर हरगोपाल और प्रोफ़ेसर आर सोमेस्वर राव को बातचीत के लिए अधिकृत किया था.
ये दोनों रविवार को राजधानी भुवनेश्वर पहुँचे और उसके तुरंत बाद गृह सचिव यूएन बेहरा और राज्य के सचिव एसएन त्रिपाठी से बातचीत की. बातचीत सोमवार को भी जारी रहेगी.
बेहरा का कहना था,''इस बात पर सहमति हुई कि माओवादी कोई ऐसा क़दम नहीं उठाएँगे जिससे शांति प्रक्रिया को नुक़सान पहुँचे.''
इस बदले सरकार वार्ता जारी रहने तक माओवादियों के ख़िलाफ़ अपना अभियान स्थगित रखने पर सहमत हो गई है.
रिहा कराने की कोशिश
इधर सरकार दो प्रमुख माओवादियों- श्रीमालु श्रीनिवास और माओवादियों के केंद्रीय समिति के नेता कामरेड रामकृष्ण की पत्नी पद्या को रिहा करवाने की कोशिश कर रही है.
लेकिन शनिवार को सरकार को स्थानीय अदालत से झटका लगा क्योंकि अदालत ने इन दोनों की ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दीं.
तीसरे माओवादी गंती प्रसाद को पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश से ट्रांजिट रिमांड पर लाया गया है और उन्हें कोरापुत अदालत में पेश किया गया. लेकिन अदालत ने उन्हें भी 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.
माओवादियों ने अधिकारियों की रिहाई के बदेल सात माओवादी नेताओं को छोड़ने की माँग रही है जिनमें से ये तीन शामिल हैं.
अब तक उड़ीसा सरकार इन तीनों को ज़मानत पर रिहा करवा पाने में विफल रही है लेकिन अधिकारियों का मानना है कि वो सोमवार को उच्च अदालत से इन्हें रिहा करवा पाने में सफल हो जाएंगे.
साथ ही सरकार ने माओवादियों के ख़िलाफ़ अभियान को रोके जाने की प्रमुख माँग को मान लिया है.
हालांकि माओवादियों की समयसीमा रविवार शाम को समाप्त हो गई लेकिन सरकार और माओवादियों की ओर से मिल रही जानकारी के मुताबिक बातचीत के मद्देनज़र समयसीमा फिर से बढ़ा दी जाएगी.












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