लीबिया में शनिवार को भी मारे गए कई प्रदर्शनकारी
माना जा रहा है कि शनिवार को मारे गए लोगों की संख्या 15 से लेकर 25 तक हो सकती है। इससे पहले न्यूयार्क स्थित मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) के मुताबिक शुक्रवार तक 84 लोग मारे गए थे। मृतकों की यह संख्या अस्पताल कर्मचारियों और प्रत्यक्षदर्शियों से टेलीफोन पर हुई बातचीत पर आधारित है।
समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक एचआरडब्ल्यू का कहना है कि ज्यादातर लोगों की मौत गोली लगने से हुई है।
विरोध प्रदर्शनों का केंद्र राजधानी त्रिपोली के बाद लीबिया का दूसरा सबसे बड़ा शहर बेनझई रहा है। नेशनल कांफ्रेंस ऑफ द लीबियन अपोजीशन (एनसीएलओ) के मुताबिक उत्तरी तटीय शहर मिसुराता में भी विरोध प्रदर्शन हुए।
ट्यूनीशिया और मिस्र में जनआंदोलन के बाद लीबिया में भी लोग 41 साल से सत्ता में बने गद्दाफी के खिलाफ सड़कों पर उतर आए थे।
लीबियाई सरकार ने विरोध प्रदर्शनों के केंद्र बने बेनझई में पत्रकारों के प्रवेश पर रोक लगा दी है और कथित रूप से टेलीफोन कनेक्शन और इंटरनेट कनेक्शन काट दिए हैं।
लीबिया के एक अज्ञात कस्बे से एक प्रत्यक्षदर्शी ने रविवार को सीएनएन से स्कईपे इंटरनेट सिस्टम के जरिए हुए संपर्क में कहा कि उनके एक मित्र ने उन्हें अस्पताल से फोन करके बताया है कि शनिवार को अस्पलाल में 200 शव लाए गए हैं।
इससे पहले एक अन्य महिला ने अल जजीरा को बताया कि बेंगझई में सुरक्षा बलों ने पेड़ों पर चढ़कर प्रदर्शनकारियों पर गोलियां बरसाईं। इस दौरान 25 लोगों की मौत हुई है। उसने कहा कि शवों को उसके घर के सामने से ले जाया गया।
एक व्यक्ति ने सीएनएन से कहा कि हमलावर कारों से अचानक आकर प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलियां चलाते हैं। उन्होंने कहा कि उनका निजी सिम कार्ड बंद कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि उनके एक करीबी मित्र की मौत हो गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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