लीबियाई नागरिकों ने सैन्य हमले को नरसंहार कहा
समाचार एजेंसी डीपीए ने बेंगझई के एक लीबियाई व्यापारी की अलजजीरा चैनल से बातचीत का हवाला देते हुए कहा है, "यह एक बड़ा नरसंहार है। हमने इससे पहले ऐसा कुछ नहीं सुना था। यह भयावह है। अस्पतालों में जगह-जगह खून बह रहे हैं, क्योंकि घायलों की बड़ी तादाद को उपचार के लिए वहां भर्ती कराया गया है।"
मिस्र और ट्यूनीशिया में तानाशाही के खिलाफ सफल विद्रोह से उत्साहित लीबिया के नागरिक भी मुअमर गद्दाफी को सत्ता से बेदखल करने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं, जो पिछले 41 साल से शासन में हैं।
सुरक्षा बलों ने पिछले सप्ताह उनके हमले में जान गंवाने वाले प्रदर्शनकारियों की मौत पर शोक मनाने वालों को भी नहीं बख्शा और शनिवार को उन्हें भी निशाना बनाया। सुरक्षा बलों के हमले में अब तक मरने वालों की संख्या 200 तक होने की बात कही जा रही है।
अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच के मुताबिक लीबिया में पहले ही सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों के हमले में 84 लोगों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा उसने अस्पताल कर्मियों और प्रत्यक्षदर्शियों से टेलीफोन पर बातचीत के जरिये जुटाई है।
बेंगझई में एक अस्पताल के डॉक्टर मरियम ने अलजजीरा से बातचीत में कहा, "यह नरसंहार है। सेना प्रदर्शनकारियों पर जिंदा कारतूस से हमले कर रही है। मैंने इसे अपनी आंखों से देखा है। सेना के जवान हर जगह हैं। यहां तक कि जिस अस्पताल में मैं काम कर रहा हूं, वहां भी हम सुरक्षित नहीं हैं। सैनिकों की गोली से 8 साल के एक बच्चे की भी जान चली गई। आखिर उसका क्या दोष था?"
बेंगझई के एक अन्य निवासी ने कहा, "हालात पहले से भी बुरे हो गए हैं। निरंतर गोलीबारी हो रही है। सेना की गोली से घायल और मरने वाले कम से कम डेढ़ सौ लोग नजदीकी अस्पताल में भर्ती हैं।"
बेंगझई के ही एक अन्य डॉक्टर ने कहा कि उनका अस्पताल ऐसे हालत को नियंत्रित करने में सक्षम नहीं है। उनके अनुसार "घायलों की बड़ी तादाद अस्पताल में आ रही है। सभी गंभीर रूप से घायल हैं। किसी के सिर में गोली लगी है, किसी की छाती में और किसी के पेट में। घायलों और मरने वालों में सभी 13 से 35 साल की उम्र के हैं। कोई पुलिस कर्मी या सेना का जवान घायल नहीं है। यह पूरी तरह गोली मारकर हत्या करने की नीति है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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