अरब देशों में प्रदर्शन, मिस्र में राजनीतिक दल को मंजूरी (राउंडअप)

काहिरा की एक अदालत ने शनिवार को इस्लामी पृष्ठभूमि वाले अल वसत को देश का पहला राजनीतिक दल होने की मंजूरी दी। अल वसत पिछले 15 वर्षो से राजनीतिक पार्टी का दर्जा पाने का प्रयास कर रहा था।

इन देशों में अब तक हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों में कई लोग मारे जा चुके हैं और तमाम अन्य घायल हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इन देशों में तत्काल सुधारों को लागू करने की वकालत की है।

लीबिया में 27 लोग मारे गए :

सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान लीबिया में शुक्रवार को 27 लोग मारे गए। इससे पहले गुरुवार तक यहां 45 लोग मारे जा चुके थे। उधर मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) ने कहा है कि लीबिया में अब तक 84 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है।

समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक उत्तर पूर्वी शहर बेंगझई में शुक्रवार को प्रदर्शन के दौरान 25 लोगों की मौत हुई। मरने वाले लोगों की संख्या की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विरोध प्रदर्शन शुक्रवार रात तक राजधानी त्रिपोली के अधिकांश इलाकों में फैल गए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि पश्चिमी शहरों में भी बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे।

विपक्षी दल नेशनल फ्रंट फॉर द सल्वेशन ऑफ लीबिया (एनएफएसएल) के मुताबिक उत्तरी शहर कुबाह में भी दो प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है। लीबिया के एक प्रदर्शनकारी ने नेटवर्किं ग वेबसाइट ट्विटर पर लिखा, "हम गद्दाफी से कोई समझौता नहीं चाहते और न ही उनके बेटे से कोई रिश्वत। हम उनका इस्तीफा चाहते हैं। हम शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं।"

एनएफएसएल ने कहा कि तैजोरा में स्थित अल-जडैडा जेल में आग लगने के बाद कैदी भाग गए हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि आग कैसे लगी। लीबिया की एक वेबसाइट के मुताबिक बेंगझई और उत्तरी शहरों की कुछ अन्य जेलों से भी कैदियों के भागने की अपुष्ट खबरें हैं।

एचआरडब्ल्यू के मध्यपूर्व और उत्तरी अफ्रीका के उपनिदेशक जो स्टोर्क ने कहा, "गद्दाफी के सुरक्षा बल लीबियाई लोगों पर गोलीबारी कर रहे हैं। बदलाव की मांग कर रहे लोगों की हत्या की जा रही है।"

बहरीन में विपक्ष का बातचीत से इंकार :

बहरीन में लोकतंत्र के समर्थन में जनांदोलन उठता देख देश के विपक्षी समूह ने शनिवार को सरकार से बातचीत करने से इंकार कर दिया। विपक्ष का कहना है कि जब तक सरकार इस्तीफा नहीं दे देती तब तक बातचीत नहीं हो सकती।

इस बीच देश के शासक हमद बिन ईसा अल-खलीफा ने अपने बड़े पुत्र को विपक्षी दलों से राष्ट्रीय स्तर पर बातचीत करने के लिए कहा है।

समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक 'इस्लामिक नेशनल एकार्ड एसोसिएशन' के वरिष्ठ सदस्य खलील इब्राहिम अल-मरजूक ने शनिवार को समाचार चैनल 'अल जजीरा' को बताया कि विपक्ष सरकार से तब तक बातचीत नहीं करेगा जब तक कि 'सड़कों से टैंक हटाए नहीं जाते' और 'सेना शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाना बंद नहीं करती।'

बीबीसी के मुताबिक एक बयान में कहा गया कि शहजादे शेख सलमान बिन हमद अल-खलीफा को सभी दलों से बातचीत करने के लिए अधिकृत किया गया है। इसके पहले शहजादे प्रदर्शनकारियों से मिले और उनसे सड़कों से हटने के लिए कहा।

ज्ञात हो कि सेना ने शुक्रवार को मनामा में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं जिसमें कम से कम 66 लोग घायल हुए।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर उस समय गोलियां चलाई जब वे पुलिस के साथ झड़प में मारे गए चार लोगों के अंतिम संस्कार में शामिल होने के बाद मनामा शहर की ओर रैली निकालने की कोशिश कर रहे थे। मनामा में ज्यादातर प्रदर्शनकारी शिया समुदाय से हैं वे सुन्नी राजशाही परिवार को सत्ता से बाहर करना चाहते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने शुक्रवार को शासक हमद बिन ईसा अल-खलीफा को फोन कर संयम बरतने के लिए कहा।

मिस्र में राजनीतिक दल अल वसत को मंजूरी :

काहिरा की एक अदालत ने शनिवार को इस्लामी पृष्ठभूमि वाले अल वसत को देश का पहला राजनीतिक दल होने की मंजूरी दी। अल वसत पिछले 15 वर्षो से राजनीतिक पार्टी का दर्जा पाने का प्रयास कर रहा था।

अल वसत की स्थापना देश के विरोधी संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड के पूर्व सदस्यों ने की थी। उन्होंने अपनी पार्टी का गठन करने के लिए संगठन को छोड़ा था।

समाचार एजेंसी 'सिन्हुआ' के मुताबिक हुस्नी मुबारक के राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद अल वसत अदालत से राजनीतिक पार्टी का दर्जा प्राप्त करने वाला देश का पहला संगठन है।

अदालत ने अल वसत को अगले संसदीय चुनावों को लड़ने का अधिकार दिया है। इसके पहले अल वसत के राजनीतिक पार्टी का दर्जा मांगने वाले आवेदन को खारिज कर दिया गया था।

उल्लेखनीय है कि अल वसत ने मिस्र के इसाइयों को पार्टी में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। उसने अपने घोषणापत्र में कहा है कि मुस्लिम बहुलता वाले समाज में एक इसाई देश का प्रमुख हो सकता है।

इस बीच फिलीस्तीन के एक प्रवक्ता ने बताया कि मिस्र की जेलों से 14 फिलीस्तीनी नागरिकों को रिहा किया गया है।

यमन में सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी :

यमन में भी राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है। लगभग 500 लोगों ने शनिवार को सना विश्वविद्यालय के सामने प्रदर्शन किया। इसके पहले शुक्रवार को दक्षिणी शहर अदन में लगभग 7,000 प्रदर्शनकारियों ने दो सरकारी इमारतों पर धावा बोला और उन्हें आग के हवाले कर दिया था।

राष्ट्रपति सालेह के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार जारी विरोध प्रदर्शन शनिवार को नौवें दिन में प्रवेश कर गया। सालेह पिछले 32 वर्षो से सत्ता में हैं।

दूसरी ओर समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने एक स्थानीय पार्षद के हवाले से कहा है कि शुक्रवार को लगभग 7,000 प्रदर्शनकारियों ने अदन में स्थानीय परिषद की दो इमारतों और एक पुलिस थाने पर धावा बोल दिया और उन्हें आग के हवाले कर दिया। इस घटना में कई लोग घायल हो गए।

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने यमन के अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे सरकार विरोधी प्र्दशनों को रोकने के लिए अधिक बल प्रयोग न करें, क्योंकि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लगातार जारी हिंसा में कई व्यक्ति घायल हो गए हैं।

जोर्डन में सरकार विरोधी प्रदर्शन:

जोर्डन की राजधानी अम्मान में सरकार विरोधी और सरकार समर्थक प्रदर्शनकारियों की भिड़ंत में कम-से-कम आठ लोग घायल हो गए। प्रदर्शनकारी संवैधानिक सुधार और निर्णय प्रक्रिया में अधिक भागीदारी चाहते हैं।

ईरान के प्रेस टीवी के मुताबिक सरकार विरोधी लगभग 2,000 प्रदर्शनकारियों पर सरकार समर्थकों ने बल्लों, पाइप और पत्थरों से हमला कर दिया। घायलों में एक पत्रकार भी है।

सरकार की आर्थिक और राजनीतिक नीति के विरोध में आंदोलन भड़कने के बाद शाह अब्दुल्ला द्वितीय ने मंत्रिमंडल भंग कर दिया है।

नए प्रधानमंत्री मारुफ बखित ने शाह के निर्देश लागू करने, वास्तविक आर्थिक और राजनीतिक सुधार करने तथा चुनाव कानून में सुधार का वादा किया है।

अल्जीरिया में बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात :

अल्जीरिया में विपक्ष की प्रस्तावित रैली के पहले ही प्रशासन ने शनिवार को राजधानी अल्जीयर्स के ज्यादातर हिस्सों में भारी संख्या में सुरक्षाकर्मियों और दंगा विरोधी पुलिस को तैनात कर दिया।

स्थानीय समाचार पत्र 'अल-खबर' ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया कि पिछले सप्ताह प्रदर्शन का केंद्र रहे 'मे 1 स्क्वे यर' पर पुलिस मौजूद है।

नागरिक समाज समूहों और विपक्षी दलों के सर्वोच्च संगठन 'द नेशनल कोआर्डिनेशन फॉर चेंज एंड डेमोक्रेसी' ने रैली का आह्वान किया है। विपक्ष ने कहा है कि वह देश में वर्ष 2001 से प्रदर्शनों पर लगे प्रतिबंध का उल्लंघन करेगा।

उल्लेखनीय है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि और बेरोजगारी के खिलाफ गत जनवरी में देश भर में प्रदर्शन हो चुके हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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