राजस्थान में हमलों के बाद दलितों ने घर छोड़ा
अलवर जिले के हुशीपुरा तथा भरतपुर जिले के चांद पुर में ऐसे ही वाकए सामने आए हैं। दोनों ही गांवों में मामूली विवाद को लेकर अन्य समुदाय के लोगों ने दलित परिवारों पर हमले किए।
राष्ट्रीय-अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति के खिलाफ होने वाले अत्याचार के मामले में राजस्थान को देश में दूसरे स्थान पर रखा है।
हुशीपुरा में 19 जनवरी को हिंसा तब भड़क उठी जब एक मुर्गी दौड़ते हुए एक दलित किसान के ट्रैक्टर के नीचे आ गई। इस पर अन्य समुदाय के लोगों ने दलित परिवारों पर पत्थर बरसाए। ऐसा ही वाकया बुधवार को चांदपुरा गांव में हुआ, जहां दलितों की बकरी अन्य समुदाय के खेत में घुस गई।
ज्ञात हो कि हुशीपुरा में 800 और चांदपुरा में 700 दलित समुदाय के लोग रहते हैं। ये दोनों गांव अलवर और भरतपुर जिला मुख्यालय से क्रमश: लगभग 100 तथा 115 किलोमीटर की दूरी पर हैं।
जिला प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर आईएएनएस को बताया, "राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के एक दल ने हुशीपुरा का दौरा किया है। कई दलित परिवार गांव से चले गए। हमारा भरोसा दिलाने पर उन में से कुछ ही लौट आए।" उन्होंने कहा कि पीड़ितों की हरसंभव सहायता की जा रही है।
अपने हाल के जयपुर दौरे के दौरान केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री मुकुल वासनिक ने कहा था कि पुलिस ने इस तरह के 4,992 मामलों की जांच शुरू की है।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी पुलिस को निर्देश दिया है कि वह संत्रास से अधिक प्रभावित इलाकों की गांव एवं तहसील स्तर पर पहचान करे, ताकि पीड़ितों की सहायता के लिए कारगर उपाय किए जा सकें।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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