इजरायली बस्तियों के खिलाफ प्रस्ताव पर अमेरिका का वीटो
अमेरिकी राजदूत सुसान राइस ने प्रस्ताव के विरोध में वोट दिया, जिसे वीटो मान लिया गया। जिन पांच सदस्य देशों को वीटो का अधिकार है, उनमें अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन और चीन शामिल हैं।
राइस ने कहा कि वीटो का अर्थ यह नहीं लगाया जाना चाहिए कि अमेरिका इजरायली बस्तियों का समर्थन करता है। राइस ने प्रस्ताव के विरोध में हाथ उठाने के बाद कहा, "हम इजरायल द्वारा लगातार जारी बस्तियों के निर्माण कार्य को कड़े शब्दों में खारिज करते हैं।"
ज्ञात हो कि सुरक्षा परिषद के किसी भी स्थायी सदस्य का नकारात्मक मत वीटो माना जाता है।
इस प्रस्ताव को यूरोपीय देशों सहित दुनिया के 130 देशों का समर्थन हासिल था। प्रस्ताव में मांग की गई थी कि सुरक्षा परिषद इस बात की घोषणा करे कि पूर्वी जेरूसलम सहित कब्जा किए गए फिलीस्तीनी भू-भाग पर इजरायल द्वारा बसाई गई बस्तियां अवैध हैं और शांति बहाली के रास्ते में बड़ा रोड़ा हैं।
प्रस्ताव में कहा गया था कि इजरायल को पूर्वी जेरूसलम सहित कब्जा किए गए फिलीस्तीनी भू-भाग पर बस्तियां बसाए जाने सम्बंधी सभी गतिविधियों को तत्काल एवं पूर्ण रूप से बंद कर देना चाहिए।
बहरहाल, 2006 के बाद और राष्ट्रपति बराक ओबामा के शासन काल का अमेरिका का यह पहला वीटो है। ओबामा ने अमेरिकी वीटो से बचने के लिए फिलीस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास को यह मसौदा वापस लेने और समझौता स्वीकार करने के लिए समझाने की कोशिश की थी।
लेकिन अब्बास एवं फिलीस्तीनी संगठनों ने अमेरिका के इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था और सुरक्षा परिषद ने यह जानते हुए भी इस मसौदे पर कार्रवाई की थी कि अमेरिकी वीटो इसे किसी भी तरह रद्द कर देगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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