अपरहण संकट पर वार्ता के लिए नक्सली की रिहाई की मांग
भुवनेश्वर। उड़ीसा सरकार ने नक्सलियों द्वारा अगवा किए गए मलकानगिरी के जिलाधिकारी और जूनियर इंजीनियर को रिहा कराने के प्रयास तेज कर दिए हैं। वहीं सरकार और नक्सलियों के बीच वार्ता कर रहे एक मध्यस्थ ने बातचीत की गति बढ़ाने के लिए जेल में बंद एक नक्सली को रिहा करने को कहा है।
जिलाधिकारी आर. विनील कृष्णा और जूनियर इंजीनियर पवित्र मोहन माझी को नक्सलियों ने बुधवार शाम को अगवा कर लिया था। प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को दो मानवाधिकार कार्यकर्ताओं आर. एस. राव और हरगोपाल को नक्सलियों से वार्ता के लिए मध्यस्थता करने का आमंत्रण दिया था।
मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने शनिवार को विधानसभा में कहा कि राव और हरगोपाल के शनिवार को भुवनेश्वर पहुंचने की उम्मीद है।हरगोपाल ने कहा कि उन्होंने सरकार से पिछले साल नवम्बर में न्यायिक हिरासत में लिए गए नक्सली नेता घांटी प्रसादम को रिहा करने की मांग की है। प्रसादम को उड़ीसा पुलिस ने आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम इलाके से गिरफ्तार किया था।
हरगोपाल ने कहा कि वे उड़िया भाषा और प्रदेश के हालात के बारे में नहीं जानते। प्रसादम की रिहाई से अपहरणकर्ताओं से वार्ता में मदद मिलेगी।
दिल्ली से एक स्थानीय टेलीविजन चैनल से बातचीत में हरगोपाल ने कहा , "मैंने उड़ीसा सरकार से प्रसादम को रिहा करने की अपील की है।" उन्होंने कहा कि प्रसादम को जिस मामले में गिरफ्तार किया गया है वह बहुत गंभीर मामला नहीं है। उन्होंने कहा, "उस पर ज्यादातर मामले आंध्र प्रदेश में दर्ज हैं और उच्च न्यायालय ने पहले ही उसे जमानत दे रखी है।"
उन्होंने कहा, "उसके रिहा होने पर मैं और आर. एस. राव स्थितियों में हस्तक्षेप की कोशिश करेंगे। प्रसादम भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की ओर से बात कर सकता है। सम्भवत: हम कोई समाधान खोज सकेंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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