सर्वोच्च न्यायालय ने बालाकृष्णन के खिलाफ वादपत्र पर रिपोर्ट मांगी (लीड-1)

सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश एस. एच. कपाड़िया, न्यायमूर्ति के.एस.राधाकृष्णन एवं न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की पीठ ने बालाकृष्णन के खिलाफ शिकायत पर स्थिति रिपोर्ट सौंपने के लिए महान्यायवादी को 14 दिनों का समय दिया। बालाकृष्णन मौजूदा समय में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष हैं।

अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील के यहां एक शिकायत दर्ज कराई गई थी। पाटील ने उस शिकायत को आगे की कार्रवाई के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास भेज दी थी।

पीठ ने महान्यायवादी से कहा कि अदालत उस शिकायत पर केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा की गई कार्रवाई की स्थिति जानना चाहती है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि बालाकृष्णन एवं उनके पारिवारिक सदस्यों ने आय से अधिक सम्पति अर्जित की है।

ज्ञात हो कि एम.फुरकान नामक एक व्यक्ति ने चार मई, 2010 को राष्ट्रपति को पत्र लिखकर प्रधान न्यायाधीश का पद संभालने के बाद से न्यायमूर्ति बालाकृष्णन और उनके पारिवारिक सदस्यों ने जो अर्जित सम्पत्ति की है, उसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की थी।

उसने कहा था कि बालाकृष्णन ने कुछ लोगों तथा व्यावसायिक संगठनों को फायदा पहुंचाने के लिए कथित तौर पर अपने पद का दुरुपयोग किया। फायदा उठाने वालों में उनके बेटे, दामाद और बेटियां भी शामिल हैं।

फुरकान ने कहा था कि बालाकृष्णन ने भारी पूंजी जमा कर रखी है और उनके बेटे ने पिछले एक वर्ष के दौरान नौ बार दुबई की यात्रा की थी।

शिकायतकर्ता ने कहा था कि उसने बालाकृष्णन के एनएचआरसी का अध्यक्ष नियुक्त किए जाने का विरोध किया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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