निठारी कांड : कोली की मौत की सजा बरकरार (लीड-2)
अदालत ने कहा, "कोली द्वारा की गई हत्याएं भयानक और क्रूरतापूर्ण थीं। इन हत्याओं को अंजाम देने में वह सुनिश्चित तरीका अपनाता था। वह अपने नियोक्ता मोनिंदर सिंह पंधेर के नोएडा स्थित घर में पीड़ित महिलाओं को बुलाने के बाद उनका गला घोंट देता था और उनके शवों के साथ बलात्कार की कोशिश करता था। उसके बाद वह शवों को टुकड़े-टुकड़े कर उसके कुछ हिस्से को पकाकर खा जाता था।"
अदालत ने कहा कि नोएडा के सेक्टर-31 स्थित पंधेर का बंगला डी-5 ऐ 'बूचड़खाना' था। अदालत ने कहा, "वह घर बूचड़खाना था। इसी घर में ये सभी लोग मौत के घाट उतारे गए।"
न्यायमूर्ति मरक डेय काटजू एवं न्यायमूर्ति ज्ञान सुधा मिश्रा की पीठ ने कहा कि कोली द्वारा किया गया अपराध 'जघन्यतम' मामलों की श्रेणी में आता है और वह मृत्युदंड से कम की सजा का हकदार नहीं है। इसलिए "कोली पर दया नहीं दिखाई जा सकती।"
अदालत ने कोली की ओर इशारा करते हुए कहा, "इस मामले में तुम मृत्युदंड के सिवा अन्य किसी सजा के हकदार नहीं हो।"
सर्वोच्च न्यायालय ने रिम्पा हलदर मामले में निचली अदालत द्वारा कोली के खिलाफ दिए गए मृत्युदंड को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा बरकरार रखे जाने से अपनी सहमति जताई है।
सजा पर अपनी मुहर लगाते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने पंधेर के बारे में कुछ नहीं कहा। निचली अदालत ने पंधेर को भी मृत्युदंड दिया था, लेकिन उच्च न्यायालय ने उसे बरी कर दिया था।
निठारी हत्याकांड के खुलासे से दिसम्बर 2009 में उस समय सनसनी फैल गई थी, जब पंधेर के बंगले के पीछे नाले में मानव शरीर के हिस्से बरामद हुए थे। ये मानव अवशेष निठारी गांव की 19 युवा महिलाओं और बच्चों के थे, जिनके साथ पंधेर के बंगले में कथित रूप से बलात्कार किया गया था और फिर उनकी हत्या कर दी गई थी।
कोली को इस हत्याकांड में पिछले वर्ष 22 दिसम्बर को मौत की चौथी सजा सुनाई गई थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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