आदर्श सोसायटी को ढहाने के आदेश को अदालत में चुनौती
सोसायटी के सदस्यों की ओर से सोमवार को नाइक परांजपे एंड कम्पनी के अमीत नाइक ने याचिका दायर की। याचिका के मुताबिक सोसायटी ने मुम्बई के भव्य कोलाबा इलाके में इमारत बनाने के लिए सरकारी विभागों से सभी आवश्यक अनुमति ले ली थीं।
इमारत को ढहाने के आदेश का विरोध करते हुए याचिका में कहा गया, "सोसायटी ने सभी नियमों का पालन किया है तथा इसने सरकार से आवश्यक अनुमति ले ली थी।"
केंद्रीय मंत्रालय ने 16 जनवरी को दिए अपने आदेश में कहा था कि घोटाले के आरोप से घिरी सोसायटी की इमारत को तीन माह के भीतर ढहा दिया जाए, क्योंकि इसने तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) अधिसूचना, 1991 का उल्लंघन किया है।
गौरतलब है कि यह इमारत कारगिल शहीदों के परिजनों के लिए छह मंजिलों की बननी थी, लेकिन कथित तौर पर अनिवार्य अनुमति लिए बिना इसमें मंजिलों की संख्या बढ़ाकर 31 कर दी गई।
ज्ञात हो कि सीआरजेड अधिसूचना के तहत तटीय क्षेत्र में किसी निर्माण कार्य के लिए अनुमति लेनी पड़ती है। मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा कि आदर्श सोसायटी ने अधिसूचना के तहत अनिवार्य अनुमति नहीं ली है।
इन सब के अलावा सोसायटी पर यह आरोप भी है कि उसने रक्षा विभाग की मुख्य भूमि हड़प ली, मंजिलों की संख्या सम्बंधी नियम (फ्लोर स्पेस इंडेक्स रूल्स), सीआरजेड की शर्तो तथा अन्य नियामों का उल्लंघन किया है।
इस घोटाले के सिलसिले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने प्राथमिक सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण का नाम भी दर्ज किया।
घोटाले में नाम आने के बाद चह्वाण को नवम्बर, 2010 में पद छोड़ना पड़ा था। चह्वाण के बाद इसी सिलसिले में मानवाधिकार आयोग के सदस्य सुभाष लल्ला को भी इस्तीफा देना पड़ा।
इसके अलावा राज्य सरकार भी उन नौकरशाहों की भूमिका की पड़ताल कर रही है, जिनके नाम इस घोटाले में आए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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