करमापा मठ भूमि पर अब हिमाचल प्रदेश सरकार का हक
उप जिला अधिकारी नरेश शर्मा सहित राजस्व अधिकारियों के एक दल ने उस भूमि जिस पर ग्यूतो तांत्रिक विश्वविद्यालय एवं मठ निर्मित है, को सरकार के नाम करने की औपचारिकताएं पूरी कीं। इनका निर्माण वर्ष 2000 के पहले किया गया।
शर्मा ने आईएएनएस को बताया कि मठ की भूमि पर अब सरकार का मालिकाना हक है।
उन्होंने बताया, "इसके पहले इस भूमि का पंजीकरण दिले राम और प्रेम सिंह के फर्जी नाम पर था। करमापा के समर्थन वाले कार्मे गार्चेन ट्रस्ट की सहमति से भूमि के मालिकाना हक की प्रक्रिया पूरी की गई।"
कांगड़ा के उपायुक्त आर.एस. गुप्ता ने कहा कि यह राजस्व विभाग की एक दैनिक कार्रवाई थी।
गुप्ता ने कहा, "तिब्बत की निर्वासित सरकार द्वारा घोषित संपत्तियों को सरकार के अधीन करने की प्रक्रिया वर्ष 2006 से की जा रही है। उन संपत्तियों में करमापा का मठ भी शामिल है।"
गुप्ता ने हालांकि कहा, "मालिकाना हक बदलने का यह मतलब नहीं है कि सरकार संपत्ति पर तत्काल नियंत्रण करने जा रही है।"
उल्लेखनीय है कि पिछले महीने करमापा के मठ से सात करोड़ रुपये मूल्य की देशी और विदेशी मुद्रा बरामद हुई। इसके बाद से जांच एजेंसियों ने करमापा और उनके सहयोगियों से पूछताछ की है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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