साथी से ऑनलाइन बातचीत में भी महत्वपूर्ण है मौन संकेत
एक नए अध्ययन के मुताबिक परंपरागत बातचीत और ऑनलाइन वार्तालाप दोनों में ही मौन संकेतों जैसे वर्तनी की गल्तियों, आश्चर्य सूचक चिन्हों और व्याकरण के इस्तेमाल का बराबर महत्व है।
क्वींसलैंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (क्यूयूटी) की मनोवैज्ञानिक व अध्ययनकर्ता जो हेजलवुड कहती हैं कि प्रेमी-प्रेमिकाओं का परंपरागत ढंग से मिलन और ऑनलाइन मिलन एक जैसा ही होता है।
विश्वविद्यालय द्वारा जारी वक्तव्य में कहा गया है कि हेजलवुड ने पाया कि परंपरागत मिलन की तरह ऑनलाइन मिलन में भी मौन वार्तालाप बहुत महत्वपूर्ण है।
वह कहती हैं, "ऑनलाइन वार्तालाप में मौन संकेत मौजूद नहीं होते लेकिन हमारे अनुसंधान में पाया गया है कि लोग अपने साथी का उसके द्वारा कही गई बातों के अलावा अन्य चीजों के आधार पर भी आकलन करते हैं।"
लोग ऑनलाइन बातचीत के दौरान वर्तनी में गल्तियों, आश्चर्यसूचक चिन्हों और व्याकरण का मौन वार्तालाप के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
हेजलवुड कहती हैं, "लोग ऐसे साथी के साथ अपने रिश्ते को आगे बढ़ाना पसंद नहीं करते जिसकी लेखन शैली उन्हें पसंद नहीं आती या जिसके बारे में उन्हें लगता है कि उसकी वर्तनी कमजोर है।"
परंपरागत मिलन और ऑनलाइन मिलन में एक और बात समान है। परंपरागत मिलन के साथ ही ऑनलाइन मिलन में भी हम अपने साथी के प्रति अपनी रुचि, वास्तविक रुचि से कम जाहिर करते हैं। दरअसल हम उसमें ज्यादा रुचि लेते हैं लेकिन यह दिखाने की कोशिश करते हैं कि हमें उसमें ज्यादा रुचि नहीं है।
हेजलवुड के शोध में पता चला है कि हर उम्र के लोग ऑनलाइन डेटिंग करते हैं और परंपरागत मिलन की तरह साथी से ऑनलाइन बातचीत भी रिश्ते को सफल बनाती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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