नौसेना वार रूम मामले में सीबीआई को नोटिस
अदालत ने यह नोटिस कमांडर (सेवानिवृत्त) जरनैल सिंह कालरा की याचिका पर जारी किया है। कालरा ने नौसेना वार रूम लीक मामले में अपने और अन्य आरोपियों के खिलाफ अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए जा रहे गोपनीय दस्तावेजों को उपलब्ध कराने की मांग की है।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति मार्कण्डेय काटजू और न्यायमूर्ति ज्ञान सुधा मिश्रा की पीठ ने सीबीआई को यह नोटिस जारी किया। इसके पहले पीठ को बताया गया कि अभियोजन पक्ष का मामला पूरी तरह इन गोपनीय दस्तावेजों पर निर्भर है और इसलिए इन दस्तावेजों को हर हाल में आरोपियों को उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि वे अपना बचाव कर सकें।
अदालत ने सीबीआई को एक अन्य याचिका पर भी नोटिस जारी किया। इस याचिका में मांग की गई है कि संवेदनशील एवं गोपनीय दस्तावेजों से सम्बंधित मुद्दे पर जब तक अदालत कोई निर्णय नहीं ले लेता, तबतक के लिए निचली अदालत में मामले की सुनवाई स्थगित कर दी जाए।
याचिकाकर्ता कालरा और सलाम सिंह राठौड़ ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें कहा गया था कि अभियोजन को इस बात के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता कि वह गोपनीय दस्तावेजों को आरोपियों को मुहैया कराए, क्योंकि यह राष्ट्रीय हित के लिए नुकसानदायक होगा।
सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों याचिकाओं पर जवाब देने के लिए सीबीआई को चार सप्ताह का समय दिया है।
सीबीआई ने रक्षा मंत्रालय के कहने पर भारतीय नौसेना की जांच रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद 2006 में मामला दर्ज किया था।
सीबीआई ने दावा किया है कि आरोपी अधिकारियों ने रक्षा मामलों से सम्बंधित जानकारी जुटाने और उसे हासिल करने के लिए एक आपराधिक साजिश रची थी। माना गया था कि ये मामले शत्रु के लिए उपयोगी होंगे, या उपयोगी हो सकते थे अथवा अनधिकृत व्यक्तियों के समक्ष इसके खुलासे से देश की एकता एवं अखण्डता को और सुरक्षा को नुकसना पहुंच सकता था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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