कुरैशी के खुलासे से पाकिस्तान सरकार असहज (लीड-1)
रेमंड दो पाकिस्तानी नागरिकों की हत्या करने के आरोप में लाहौर की जेल में है।
कुरैशी के इस खुलासे के बाद सम्भावित नुकसान की क्षतिपूर्ति करने और हालात का जायजा लेने के लिए राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने रविवार को एक बैठक की। पूर्व विदेश मंत्री के इस खुलासे ने दोनों देशों के रिश्तों को और तनावपूर्ण बना दिया है।
अमेरिकी पहले ही पाकिस्तान को चेता चुका है कि यदि वह रेमंड को रिहा नहीं करता तो वह आतंक के खिलाफ लड़ाई में इस्लामाबाद को 1.5 अरब डॉलर की सहायता राशि देने के अपने वादे से पीछे हट जाएगा।
इस बीच सरकार के प्रवक्ता और संघीय सूचना मंत्री फिरदौस आशिक अवान ने इस बात से इंकार किया है कि "किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने के लिए कुरैशी पर न तो दबाव था और न ही उन्होंने अमेरिका को खुश करने के लिए कोई बयान दिया।"
सरकारी टेलीविजन पीटीवी को उन्होंने कहा, "मंत्रिमंडल में हुए फेरबदल में कुरैशी को शामिल न किए जाने की वजह से वह आरोप लगा रहे हैं।" उन्होंने कहा, "इस तरह के बयानों से सरकार और पार्टी में केवल भ्रम की स्थिति उत्पन्न होगी।"
सत्तारूढ़ पार्टी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के महासचिव परवेज अशरफ ने कहा, "यदि अमेरिकी अधिकारी कुरैशी पर दबाव बना रहे थे तो उन्हें पार्टी को विश्वास में लेना चाहिए था।"
कुरैशी ने शनिवार को कहा कि हिलेरी क्लिंटन ने उन्हें फोन किया था "और डेविस को कूटनीतिक प्रतिरक्षा प्राप्त होने की सार्वजनिक रूप से पुष्टि करने के लिए कहा था।"
कुरैशी ने कहा, "पाकिस्तान में अमेरिकी दूत कैमरन मुंटर ने भी फरवरी के पहले सप्ताह में फोन किया और कहा कि यदि मैं उनकी मांगों को पूरी नहीं करता हूं तो क्लिंटन छह फरवरी को म्यूनिख सम्मेलन में मुझसे नहीं मिलेंगी।"
विदेश मंत्रालय से अपनी विदाई के बाद उन्होंने पत्रकारों को बताया, "मैंने ऐसा करने से इंकार कर दिया क्योंकि यह मामले की तथ्यात्मक स्थिति के प्रतिकूल था।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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