दुनिया का अन्नदाता बन सकता है भारत : सिंधिया

सिंधिया ने कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपेडा) की ओर से यहां आयोजित एक पुरस्कार समारोह में कहा, "हमारी अर्थव्यवस्था के लिए कृषि क्षेत्र महत्वपूर्ण है, क्योंकि हमारी 60-70 प्रतिशत आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। हमें ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए कृषि क्षेत्र में 4.5 से पांच प्रतिशत वृद्धि की आवश्यकता है।"

सिंधिया ने दूसरी हरित क्रांति की आवश्यकता को रेखांकित किया।

ज्ञात हो कि उर्वरक, कीटनाशक, सिंचाई सुविधाओं और उच्च उत्पादक बीजों के संयुक्त इस्तेमाल को 1965 और 1980 के प्रारम्भिक दशक में हरित क्रांति कहा गया था। और इस कारण देश में चावल और गेहूं का उत्पादन लगभग चार गुना बढ़ गया था।

सिंधिया ने कहा, "कृषि में समुचित निवेश, तकनीकी नवाचार और खाद्य प्रसंस्करण की अधोसंरचना खड़ी कर भारत दुनिया में अनाज की टोकरी बन सकता है।"

वाणिज्य सचिव राहुल खुल्लर ने कृषि सामानों के निर्यात के मुद्दे पर कहा कि भारतीय कृषि उत्पादों को अगले तीन वर्षो में 15 अरब डॉलर का निर्यात लक्ष्य हासिल करने के लिए मूल्य श्रृंखला बढ़ानी होगी।

खुल्लर ने कहा कि कृषि क्षेत्र के सामने मुख्य चुनौती, उभर रहे कई तरह के गैर टैरिफ अवरोधों से निपटने की होगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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