मिस्र के घटनाक्रम का कश्मीर पर हो सकता है असर : महबूबा
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने महबूबा की इस टिप्पणी को खारिज करते हुए कहा, "लगता है जैसे वह राज्य में सैन्य शासन चाहती हों।"
यहां एक संवाददाता सम्मेलन में महबूबा ने शनिवार को कहा, "हमने हालांकि यह संवाददाता सम्मेलन पहले ही बुलाने की सोची थी, लेकिन इसी बीच मिस्र में मुबारक का तख्ता पलट गया।"
उन्होंने कहा, "हम मिस्र के लोगों को उनकी उपलब्धि के लिए बधाई देते हैं। लेकिन उनके लिए हालात माकूल थे, क्योंकि सेना उनके साथ थी और उसने लोगों का बचाव किया।"
महबूबा ने कहा, "यहां कश्मीर में भी हमने इंसाफ की लड़ाई लड़ी है। चार माह पहले गर्मियों में मची खलबली इसका ताजा उदाहरण है। यहां के नेतृत्व ने हजारों युवकों और अन्य लोगों को पहले लश्कर-ए-तैयबा के एजेंट कहकर उनके साथ दानवों जैसा व्यवहार किया। फिर उन्हें पैसे पर बिके एजेंट कहा और हाल में उन्हें नशाखोर की संज्ञा दी गई।"
मिस्र और कश्मीर के राजनीतिक हालात की तुलना करते हुए महबूबा ने कहा, "मिस्र के लोगों ने जनतंत्र के लिए लड़ाई लड़ी और कश्मीर के लोग जनतंत्र रहने के बावजूद उसके लिए लड़ रहे हैं।"
महबूबा की इस टिप्पणी पर अब्दुल्ला ने ट्विटर पर लिखा, "महबूबा अब कश्मीर में मिस्र को दोहराए जाने की बात कर रही है। ऐसा लगता है जब से वह विपक्ष में हैं तभी से राज्य में सैन्य शासन चाहती हों।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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