'फैज भारत-पाकिस्तान की राजनीति से परे हैं'
लाहौर, 12 फरवरी (आईएएनएस)। प्रख्यात उर्दू शायर फैज अहमद फैज की बेटी सलीमा हाशमी का कहना है कि उनके शायर पिता भारत व पाकिस्तान की राजनीति से परे हैं और वह दोनों देशों के बीच पुल का काम कर सकते हैं।
हाशमी ने यहां आईएएनएस को बताया, "निर्वासन के दौरान अपने 70वें जन्मदिन पर फैज दिल्ली में एक बड़े जलसे में थे, जहां उनकी शायरी की सराहना की गई थी। फैज ने उस समय कहा था कि उन्होंने इसे पाकिस्तानी लोगों के प्रति भारत के प्रेम के एक संकेत के रूप में लिया है।"
सलीमा ने कहा, "फैज पाकिस्तानियों के संघर्ष से गहराई से जुड़े हुए थे। जब भारत में लोग फैज की याद में उत्सव मनाते हैं तो यह सिर्फ फैज के लिए संदेश नहीं है, बल्कि उनके लोगों के लिए भी।"
सियालकोट में 1911 में पैदा हुए फैज भारत के राजनीतिक एवं सांस्कृतिक गलियारों में सक्रिय थे। आजादी के बाद वह पाकिस्तान चले गए। वहां उन्होंने एक पत्रकार, शिक्षक, कॉलेज प्राचार्य और कार्यकर्ता आदि के रूप में काम किया। 1982 में उनका निधन हो गया।
लाहौर में फैज की स्मृति में सप्ताह भर लम्बा शताब्दी समारोह आयोजित किया गया है, जिसका फैज के जन्मदिन 13 फरवरी को समापन होगा। यह समारोह फैज प्रतिष्ठान न्यास की ओर से आयोजित किया गया है। समारोह की एक शाम भारतीय फिल्मी हस्तियों के नाम है, जिसमें शबाना आजमी व जावेद अख्तर शिरकत कर रहे हैं।
समारोह में हिस्सा लेने के लिए भारत से 20 सदस्यीय एक प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को लाहौर पहुंचा, जिसमें गायिका ईला अरुण, लेखक अतुल तिवारी व शमा जैदी, निर्देशक एम. एस. सथ्यू, अभिनेताओं में राजेंद्र गुप्ता एवं लुब्रा सलीम तथा शिक्षकों में असगर वजाहत और सुरेश छाबरिया जैसे लोग शामिल हैं।
फैज की जन्म शताब्दी के सिलिसिले में ही हाशमी पिछले सप्ताह दिल्ली में थीं। दिल्ली, मुम्बई और लखनऊ जैसे कई शहरों में फैज के प्रशंसक फैज की स्मृति में समारोह आयोजित कर रहे हैं।
सलीमा ने आईएएनएस को यहां बताया, "फैज के प्रति हर कोई संवेदनशील है। यहां तक कि भारत और पाकिस्तान में सत्ता के गलियारों में बैठे अड़ियल लोगों ने भी फैज की जन्म शताब्दी मनाने के लिए अपने मतभेदों को भुला दिया है। फैज उनकी राजनीति की पहुंच से परे हैं।"
फैज की शायरी पूरी दुनिया में लगातार गूंज रही है।
हाशमी ने कहा, "मैं अपनी यात्राओं के दौरान फैज को फिलिस्तीन, दक्षिण अफ्रीका, स्वात घाटी, पश्चिम बंगाल एवं भारत के दक्षिणी हिस्सों में पाया। उनकी शायरी की भावना इतनी स्वाभाविक है कि कोई भी आतंक उसे हिला नहीं सकता है। उनकी शायरी इस सच को जाहिर करती है कि हम सभी के लिए एक जैसा भविष्य है।"
फैज की प्रमुख रचनाओं में 'नक्श-ए-फरियादी', 'दस्त-ए-सबा' और 'जिंदां-नामा' शामिल हैं। फैज की शायरी का अंग्रेजी और रूसी सहित कई भाषाओं में अनुवाद हुआ है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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