आरबीआई से ब्याज दरें न बढ़ाने का आग्रह (लीड-2)
शुक्रवार को जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक औद्योगिक उत्पादन की दर में यह गिरावट विनिर्माण क्षेत्र के कमजोर प्रदर्शन के कारण हुई है।
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) विनिर्माण जैसे विभिन्न क्षेत्रों के उत्पादों की मापक इकाई है। योजना आयोग द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़े के अनुसार, आईआईपी अप्रैल से दिसम्बर तक की अवधि के दौरान 8.6 प्रतिशत पर रहा है, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में दर्ज की गई औद्योगिक उत्पादन की दर के बराबर है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के अध्यक्ष राजन भारती मित्तल ने कहा, "दिसम्बर में विनिर्माण क्षेत्र में तीव्र गिरावट के लिए भारी आधार प्रभाव एक कारण हो सकता है। इसके अलावा चुस्त मौद्रिक नीति और राहतों को आंशिक रूप से समाप्त किया जाना भी इसके कारण हो सकते हैं।"
नवम्बर महीने में औद्योगिक उत्पादन की दर 2.7 प्रतिशत घोषित की गई थी जिसे अब संशोधित करके 3.6 प्रतिशत किया गया है।
दिसम्बर में विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन वृद्धि की दर एक प्रतिशत दर्ज की गई जो कि पिछले वित्त वर्ष के इसी महीने में 19.6 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
इस महीने पूंजीगत वस्तुओं की उत्पादन वृद्धि की दर 13.7 प्रतिशत रही है जबकि पिछले वित्त वर्ष के दिसम्बर महीने में यह दर 42.9 प्रतिशत रही थी।
खनन क्षेत्र की विकास दर भी पिछले साल के 11.1 प्रतिशत की तुलना में घटकर 3.8 प्रतिशत रह गई है। बिजली क्षेत्र की विकास दर हालांकि बढ़कर छह प्रतिशत हो गई जो कि पिछले वित्त वर्ष के इसी महीने में 5.4 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में शामिल 17 उद्योगों में से इस महीने 12 उद्योगों में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई।
मित्तल ने कहा, "विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि दर नीचे जा रही है, क्योंकि यह स्पष्ट है कि दिसम्बर में मशीनरी और उपकरण 12.8 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि देखी गई। इस तीव्र गिरावट के आलोक में हम सजग करते हैं कि मौद्रिक नीति को अब अतिरिक्त चुस्त न किया जाए और राहतों में और कटौती न की जाए।"
इन आंकड़ों पर टिप्पणी करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा, "आंकड़े निराशाजनक हैं लेकिन इसकी आशंका थी।" उन्होंने कहा कि मासिक आंकड़ों से संपूर्ण स्थिति का पता नहीं चलता।
वित्त मंत्री ने कहा, "मासिक और साप्ताहिक आंकड़े सही स्थिति बयान नहीं कर पाते। आपको पूरे वर्ष के आंकड़े ध्यान में रखने चाहिए। हमें देखना होगा कि पूरे साल के आंकड़ों पर इनका क्या असर पड़ता है।"
डिलाइट, हस्किन एंड सेल्स के निदेशक अनीस चक्रवर्ती ने कहा, "हम नहीं समझते कि आरबीआई दिसम्बर के आईआईपी के आंकड़ों पर अधिक प्रतिक्रिया देगा। ब्याज दरें ऊंची बनी रहेंगी और महंगाई चिंता का मुख्य कारण बना रहेगा।"
महंगाई दर पर नियंत्रण के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले महीने प्रमुख ब्याज दरों में वृद्धि की थी साथ ही भविष्य में और सख्ती के संकेत दिए थे।
योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा कि औद्योगिक उत्पादन के ताजा आंकड़ों की ज्यादा चिंता मत कीजिए।
अहलूवालिया ने कहा, "आईआईपी में मासिक उतार-चढ़ाव का ज्यादा असर नहीं होता। साथ ही यह जब ऊंचे स्तर पर पहुंचता है तो यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि यह इसी स्तर पर बना रहेगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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