सेन की जमानत याचिका खारिज, सर्वोच्च न्यायालय जाएंगे समर्थक (राउंडअप)
सेन के परिवार और समर्थकों ने न्यायालय के इस फैसले को 'निराशाजनक' बताया और कहा कि वह इस फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील करेंगे।
न्यायमूर्ति टी. पी. शर्मा और न्यायमूर्ति आर. एल. झंवर की खंडपीठ ने खचाखच भरी अदालत में यह फैसला सुनाया।
इस मामले में छत्तीसगढ़ सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त महाधिवक्ता व अभियोजन पक्ष के वकील किशोर भादुरी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "उच्च न्यायालय अपने 20 पृष्ठ के फैसले में बहुत हद तक मेरे तर्को से सहमत दिखा। मुझे खुशी है कि अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी।"
उन्होंने कहा, "आरोपी की ओर से दायर आवेदन खारिज कर दिया गया।"
गत 24 दिसम्बर को रायपुर की निचली अदालत ने राष्ट्रद्रोह के आरोप में सेन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सेन पर नक्सली विचारक नारायण सान्याल के साथ सम्पर्क रखने का आरोप है। उन्हें रायपुर की जेल में रखा गया है।
सेन के समर्थन में पक्ष रखने वाले अन्य वकील सुरेंद्र सिंह ने पत्रकारों को बताया कि उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने के लिए वह सर्वोच्च न्यायालय में एक विशेष अनुमति याचिका दाखिल करेंगे।
उन्होंने कहा, "उच्च न्यायालय को प्रथम दृष्ट्या लगा कि आवेदनकर्ता अपराधों का दोषी है।"
सेन के भाई दीपांकर ने कहा, "सेन सम्मानित व्यक्ति हैं। मुझे उम्मीद है कि उन्हें सर्वोच्च न्यायालय से जमानत मिल जाएगी।"
सेन की पत्नी इलीना सेन ने न्यायालय के इस फैसले को 'अत्यंत निराशाजनक' बताया।
उन्होंने आईएएनएस से कहा, "यह बहुत ही निराशाजनक है लेकिन मैं सर्वोच्च न्यायालय जाऊंगी क्योंकि इसके सिवाय मेरे पास कोई अन्य विकल्प नहीं है।"
सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश ने उच्च न्यायालय के इस फैसले को 'अत्यंत दुखद' बताया।
स्वामी ने कहा, "मैं इस तरह के दुखद फैसले की उम्मीद नहीं कर रहा था। सेन एक महान सामाजिक कार्यकर्ता हैं। मैं वास्तव में बहुत दुखी हूं।"
पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) छत्तीसगढ़ के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र के. सैल ने कहा, "यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं कम से कम उच्च न्यायालय से न्याय की उम्मीद कर रहा था लेकिन फैसले को सुनकर मैं स्तब्ध हूं।"
सेन की सजा की देश व दुनिया के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने आलोचना की थी। इन कार्यकर्ताओं का कहना है कि राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार सेन द्वारा सामाजिक अधिकार के मुद्दों को जोरशोर से उठाए जाने के कारण उन्हें अपना निशाना बना रही है।
न्यायालय ने बुधवार को सेन की याचिका पर भादुरी का पक्ष सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। राज्य सरकार ने सेन के नक्सलियों के साथ सम्पर्क होने के आधार पर उनकी जमानत याचिका का विरोध किया था।
यूरोपीय संघ की दो महिला प्रतिनिधि इस मामले की सभी तीनों सुनवाई के दौरान उपस्थित रहीं। पहली सुनवाई 24 जनवरी को हुई थी जबकि दूसरी 25 जनवरी को और तीसरी आज यानी नौ फरवरी को हुई।
गत 24 जनवरी को प्रख्यात वकील राम जेठमलानी ने निचली अदालत के फैसले में खामियों का हवाला देकर सेन की जमानत दिए जाने की मांग की थी। उन्होंने सेन की सजा को 'बिना साक्ष्यों वाला मुकदमा' और 'राजनीतिक अभियोजन' करार दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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