रेयात ने सजा के ख़िलाफ़ अपील की

रेयात ने सज़ा के ख़िलाफ़ अपील की
इंद्र जीत सिंह रेयात अबतक 22 साल की जेल की सज़ा भुगत चुके हैंएयर इंडिया के विमान में वर्ष 1985 में हुए विस्फोट के मामले में झूठ बोलने के दोषी पाए गए इंद्रजीत सिंह रेयात ने फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की है.

अदालत ने उन्हें नौ साल की सज़ा सुनाई थी.इंद्रजीत सिंह रेयात अकेले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें इस विमान विस्फोट के मामले में सज़ा सुनाई गई है.वे इस विस्फोट और एक अन्य विस्फोट के मामले में 22 वर्ष से अधिक समय जेल में गुज़ार चुके हैं.वर्ष 2005 में इस मामले की सुनवाई पूरी हुई थी और रेयात के दो कथित सहयोगियों को रिहा कर दिया गया था जिन पर सिख़ अलगाववादी होने का भी आरोप था.

एयर इंडिया के विमान में 23 जून 1985 को आयरिश तट के पास हुए विस्फोट में 329 लोगों की मौत हो गई थी. इनमें से ज़्यादातर लोग सिख थे और कैनेडा के नागरिक थे जो भारत में अपने रिश्तेदारों से मिलने आए हुए थे.इसी समय जापान में समय से पहले एक बम फट गया था जिसने विमान में सामान चढ़ाने वाले दो व्यक्तियों की जानें ले ली थीं.रेयात को पिछले साल एक अदालत ने शपथ लेकर झूठ बोलने का दोषी पाया गया था. उन्होंने ये शपथ पत्र वर्ष 2003 में दाखिल किया था.

हालांकि रेयात के वकील ने कहा था कि अंग्रेज़ी न समझ में न आने की वजह से यह चूक हो गई थी.अब अदालत में अपील दायर करते हुए रेयात ने कहा है कि उन्हें जो सज़ा सुनाई गई है वह 'बहुत कड़ी और बहुत अधिक' है.उन्होंने अपनी अपील में कहा है कि उनके मामले का फ़ैसला करते हुए जज से कुछ चूक हुई और उसने जूरी को भी दिग्भ्रमित कर दिया.उन्होंने अदालत से अपने मामले की नए सिरे से सुनवाई की अपील की है.

एयर इंडिया की उड़ान संख्या - 182 ने जून 1985 में कनाडा से भारत के लिए उड़ान भरी थी लेकिन विस्फोट के बाद यह आयरलैंड के पास अटलांटिक महासागर में गिर गया था और इसमें सवार सभी यात्री मारे गए थे.इसी समय जापान में एक बम समय से पहले फट गया था जिससे विमान में सामान चढ़ाने वाले दो व्यक्ति मारे गए थे.

जाँच में बहुत सी परेशानियों के बाद वर्ष 2005 में दो सिख अलगाववादियों - रिपुदमन सिंह मलिक और अजैब सिंह बागड़ी पर कई आरोपों के साथ मुक़दमा चलाया गया था लेकिन सुबूत न होने की वजह से बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया था.जापान में हुए विस्फोट के लिए रेयात को ब्रिटेन की अदालत ने 1991 में दस साल की सज़ा सुनाई थी.वर्ष 2003 में कनाडा की एक अदालत ने उन्हें लोगों की जान लेने का दोषी पाया था और पाँच साल की सज़ा सुनाई थी. वर्ष 2006 में उनके ख़िलाफ़ अदालत में झूठ बोलने का मुक़दमा शुरु किया गया था.

जुलाई 2008 से वे ज़मानत पर जेल से रिहा कर दिए गए थे. इसी साल जून में इस मामले की जाँच के दौरान कहा गया था कि कनाडाई सुरक्षा एजेंसी की एक के बाद एक ग़लतियों की वजह से यह हादसा हुआ.

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