राष्ट्रपति पर टिप्पणी कर बुरे फंसे मंत्रीजी

खान ने मंगलवार को पाली जिले की कांग्रेस समिति की एक बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा था कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की रसोई में खाना बनाने और चाय तैयार करने के लिए प्रतिभा पाटील को राष्ट्रपति के पद से नवाजा गया।

उन्होंने कहा था कि वर्ष 1977 में इंदिरा गांधी जब चुनाव हार गई थी तो पाटील उनके रसोई में खाना बनाया करती थी और यहां तक कि उनके बर्तन भी साफ किया करती थी।

बकौल खान, "अंतत: उन्हें देश के सर्वोच्च पद पर बिठाया गया। पूर्व प्रधानमंत्री के प्रति उनकी निष्ठा का सम्मान किया गया।"

खान के इस बयान की चौतरफा निंदा होने के बाद बुधवार को उन्होंने इस बारे में मीडिया के समक्ष अपनी सफाई पेश की।

उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "मेरी बातों को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया। मेरे कहने का अर्थ था कि पाटील एक सामान्य कार्यकर्ता थी और चूंकि वह निष्ठावान और अनुशासित कार्यकर्ता बनी रहीं, इसलिए उन्हें राष्ट्रपति बनने का मौका मिला।"

उन्होंने कहा, "जब इंदिरा गांधी और पाटील साथ रहा करती थीं, तो वे खाना और चाय बनाया करती थीं। मेरे कहने का अर्थ राष्ट्रपति के प्रति असम्मान व्यक्त करना नहीं था।"

"मैं पार्टी कार्यकर्ताओं से कह रहा था कि वे भी संतोष रखे और बिना कोई मांग किए पार्टी की सेवा करते रहे। प्रतिभा पाटील हमारे समक्ष एक उदाहरण हैं और हमें उनका अनुसरण करना चाहिए।"

इससे पहले, खान के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस विधायक प्रताप सिंह खचरियावास ने कहा, "एक मंत्री को ऐसी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी। पाटील की विश्वसनीयता पर कोई सवाल नहीं उठा सकता।"

भाजपा नेता व पूर्व मंत्री राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा, "इस प्रकार की अशोभनीय टिप्पणी अनुचित है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को उन्हें अपने मंत्रिमंडल से बाहर कर देना चाहिए।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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