आरुषि हत्याकांड : तलवार दंपति पर चलेगा मुकदमा (राउंडअप)

तलवार दंपति के वकील ने कहा कि वे इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगे।

मई 2008 में तलवार के घरेलू नौकर हेमराज और आरुषि की हत्या के बाद पहली बार मामले में मुकदमा चलाने का रास्ता साफ करते हुए सीबीआई की विशेष दंडाधिकारी प्रीती सिंह ने तलवार दंपति के खिलाफ आदेश पारित किया।

ज्ञात हो कि सीबीआई ने 29 दिसम्बर 2010 को यह कहते हुए अदालत में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की थी कि इस हत्याकांड में राजेश तलवार मुख्य संदिग्ध हैं लेकिन उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं।

सीबीआई की इस दलील का तलवार दंपति ने विरोध किया और उन्होंने अदालत से अंतिम रिपोर्ट की एक प्रति उपलब्ध कराने की मांग की लेकिन उनके अनुरोध को अदालत ने खारिज कर दिया। तलवार ने अंतिम रिपोर्ट के खिलाफ 90 पन्नों का एक खंडन भी अदालत को सौंपा है।

सीबीआई दंडाधिकारी ने अपने आदेश में कहा है कि तलवार दंपति पर भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120बी (आपराधिक साजिश रचने), 302 (हत्या), 201 (साक्ष्यों को मिटाने का अपराध) और 34 (कई लोगों द्वारा आपराधिक कृत्य) के तहत मुकदमा चलेगा।

अदालत के आदेश पर नूपुर तलवार ने कहा, "यह एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण आदेश है। हम इस आदेश को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगे। अदालत ने हमारी 90 पन्नों वाली विरोध याचिका को ध्यान में नहीं रखा।"

तलवार दंपति की वकील रेबेका जॉन ने कहा कि अदालत के फैसले के बाद तलवार परिवार स्तब्ध है।

उन्होंने कहा, "हम इस आदेश को चुनौती देंगे और ऊपरी अदालत जाएंगे। हम सीबीआई की अंतिम रिपोर्ट पर आश्चर्यचकित हैं क्योंकि इसमें बहुत सारी खामियां हैं।"

जॉन ने कहा, "अदालत के आदेश पर हम निश्चितरूप से आश्चर्यचकित हैं। मामले में 28 फरवरी को अगली सुनवाई में पेश होने के लिए राजेश तलवार को बुलाया जाना जायज नहीं ठहराया जा सकता।"

अदालत के आदेश पर वरिष्ठ वकील खालिद खान ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "अदालत का फैसला मील का पत्थर और प्रशंसनीय है। अदालत ने अंतिम रिपोर्ट को खारिज कर तथ्यों के आधार पर मामले को संज्ञान में लिया है।"

अदालत ने मंगलवार को इस मामले में सीबीआई द्वारा दाखिल अंतिम रिपोर्ट पर अपना फैसला बुधवार तक के लिए टाल दिया था।

सीबीआई की विशेष न्यायाधीश प्रीती सिंह को जांच एजेंसी ने बताया था कि उसे इस हत्याकांड में कोई महत्वपूर्ण साक्ष्य नहीं मिले हैं, इसलिए उसने अंतिम विकल्प के रूप में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की।

सीबीआई के वकील आर.के.सैनी ने अदालत से कहा, "दीवार पर पाए गए हाथ और अंगुलियों के निशान को भी फोरेंसिक प्रयोगशाला सत्यापित नहीं कर सकी।"

ज्ञात हो कि आरुषि (14) की, नोएडा के जलवायु विहार स्थित उसके माता-पिता के घर में 16 मई, 2008 को रहस्यमय परिस्थितियों में हत्या कर दी गई थी। शुरू में उसके घरेलू नौकर हेमराज पर हत्या का शक था। लेकिन एक दिन बाद फ्लैट की छत पर हेमराज का शव पाया गया था।

दोनों की हत्या के बाद राजेश तलवार को गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन जांच में उनके खिलाफ साक्ष्य न मिलने पर उन्हें रिहा कर दिया गया।

गत 25 जनवरी को अदालत परिसर में एक युवक उत्सव शर्मा ने धारदार हथियार से राजेश तलवार पर हमला किया। युवक सीबीआई के अंतिम रिपोर्ट का विरोध कर रहा था। जबकि गत 30 जनवरी को लोगों ने जंतर मंतर पर इकट्ठा होकर मोमबत्तियां जलाईं और आरुषि को न्याय दिलाने की मांग की।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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