मिस्र में 16वें दिन प्रदर्शन जारी, सरकार ने दी चेतावनी (लीड-1)
पिछले दो सप्ताह से जारी प्रदर्शन के बाद मुबारक ने कई सुधारात्मक कदम उठाए लेकिन आंदोलनकारियों ने सभी को खारिज कर दिया और मुबारक के इस्तीफे से कम पर मानने को तैयार नहीं है। इस बीच देश के उपराष्ट्रपति उमर सुलेमान ने यह कहकर कि 'मिस्र अभी लोकतंत्र के लिए तैयार नहीं है' एक नया विवाद पैदा कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी जारी की है कि अराजकता की स्थिति को लम्बे समय तक बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
एक तरफ सरकार ने सत्ता हस्तांतरण के लिए संविधान की समीक्षा पर सहमति जताई है वहीं उमर सुलेमान ने यह कहकर विवाद पैदा कर दिया है कि मिस्र अभी लोकतंत्र के लिए तैयार नहीं है। मिस्र में सत्ता हस्तांतरण के लिए सरकार और विपक्ष के बीच हुई वार्ता के बाद विपक्ष के नेता और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद अल बरदई ने इसी संदर्भ में कहा था कि विश्वास बहाली सबसे पहला कार्य होना चाहिए।
इस बीच अमेरिका ने मिस्र में सत्ता हस्तांतरण के लिए वार्ता की धीमी गति के लिए मिस्र सरकार की आलोचना करते हुए आपातकालीन कानून तत्काल हटाने और सुधार प्रक्रिया तेज करने को कहा है।
मुबारक को सत्ता से बेदखल करने के लिए प्रदर्शनकारी 25 जनवरी से राजधानी काहिरा के तहरीर चौक पर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इस क्रम में मंगलवार को अब तक की सबसे बड़ी रैली निकाली गई जिसमें देशभर से आए कई नए लोगों ने भी हिस्सेदारी की। इससे पहले पिछले शुक्रवार को 10 लाख लोगों की रैली निकाली गई थी। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने आने वाले शुक्रवार को एक बार फिर 10 लाख लोगों की रैली निकालने की योजना बनाई है।
दो सप्ताह से अधिक समय से जारी जनविद्रोह को भांपते हुए मुबारक ने पिछले दिनों सरकार के शीर्ष नेतृत्व में फेरबदल करने के साथ ही कई सुधारात्मक कदम उठाकर प्रदर्शनकारियों के गुस्से को कम करने की कोशिश की थी। हालांकि वह इसमें अब तक कामयाब नहीं हो सके हैं।
इन उपायों में सत्ता हस्तांतरण के लिए संविधान की समीक्षा के वास्ते एक समिति गठित करने, काहिरा में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों और सरकार समर्थकों के बीच हुए हिसक संघर्ष की जांच के लिए स्वतंत्र आयोग गठित करने का आदेश दिया गया।
इसके साथ ही मुबारक ने लोगों को लुभाने के लिए सरकार में फेरबदल के बाद सोमवार को पहली बार हुई कैबिनेट की बैठक के जरिये सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में 15 फीसदी की वृद्धि करने का वादा किया लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इन सभी सुधारों और लुभावने वादे को खारिज कर दिया और मुबारक के गद्दी छोड़ने की मांग पर अब भी डटे हुए हैं।
मिस्र में पिछले 30 साल से सत्तारूढ़ मुबारक ने अगस्त में उनका कार्यकाल खत्म होने से पहले इस्तीफा देने से इंकार कर दिया है।
पिछले 25 जनवरी से जारी प्रदर्शन में हताहतों की संख्या के बारे में सरकार की ओर से अभी तक को आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है लेकिन ह्यूमन राइट्स वाच (एचआरडब्ल्यू) के मुताबिक काहिरा, अलेक्जेंड्रेया और स्वेज के आठ अस्पातलों से लिए गए आंकड़ों के मुताबिक अब तक 297 लोगों की मौत हो चुकी है। उधर संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि 25 जनवरी से जारी प्रदर्शनों में कम से कम 300 लोगों की मौत हुई और 4000 घायल हुए हैं।
अमेरिका ने कहा, आपातकालीन कानून हटाए सरकार :
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जो बिडेन ने मिस्र के उपराष्ट्रपति उमर सुलेमान से फोन पर बातचीत में कहा कि मिस्र सरकार पिछले 30 साल से लागू आपातकालीन कानूनों को फौरन हटाए और पत्रकारों और नागरिक संगठनों के कार्यकर्ताओं को पीटना और गिरफ्तार करना बंद करे।
बिडेन ने कहा कि मिस्र की सरकार सत्ता परिवर्तन के लिए तत्काल और स्थाई कार्रवाई करे।
व्हाइट हाउस से जारी एक बयान में सुलेमान के उस बयान को बेकार बताया गया है जिसमें उन्होंने कहा था कि मिस्र लोकतंत्र के लिए तैयार नहीं है।
व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव राबर्ट गिब्स ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा, "उपराष्ट्रपति सुलेमान ने कुछ अनुपयोगी बयान दिए हैं जैसे कि उन्होंने कहा है कि मिस्र लोकतंत्र के लिए तैयार नहीं है।"
उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि बेहतर अवसरों और स्वतंत्रता के लिए किसी समयबद्ध कार्ययोजना पर विचार किया जा रहा है।"
गिब्स ने सुलेमान के एक और बयान की आलोचना की है जिसमें उन्होंने कहा था कि मिस्र में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में मुस्लिम कट्टरपंथियों सहित विदेशी तत्वों का हाथ है या वह प्रदर्शनकारियों को प्रेरित कर रहे हैं।
गिब्स ने कहा, "मुझे लगता है कि यह महज बयानबाजी है कि हम टीवी पर जिन प्रदर्शनों को देख रहे हैं वे कुछ विदेशियों ने प्रायोजित किए है।"
उन्होंने कहा, "सरकार प्रदर्शनकारियों, पत्रकारों और नागरिक समूहों से जुड़े कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित करना और हिरासत में रखना बंद करे।"
मून ने की शांतिपूर्ण परिवर्तन की अपील :
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने संकटग्रस्त मिस्र में 'चरणबद्ध और शांति पूर्ण' तरीके से परिवर्तन की अपील की है।
उन्होंने आशा जताई की नेताओं और लोगों के बीच वास्तविक बातचीत से इस प्रक्रिया की शुरुआत होगी।
मून ने मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में यह बयान जारी किया। इस दौरान वह संवाददाताओं को अपनी हाल की स्विटजरलैंड, इथोपिया, ब्रिटेन और जर्मनी की यात्रा के बारे में बता रहे थे।
उन्होंने कहा कि मिस्र में चरणबद्ध और शांतिपूर्ण परिवर्तन महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा, "इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के तरीके और उनके देश का भविष्य निश्चित तौर पर वहां के लोगों को ही तय करना है। संयुक्त राष्ट्र उनको किसी भी तरह का समर्थन मुहैया कराने के लिए तैयार है।"
मिस्र में करीब 30 वर्षो से सत्ता पर काबिज राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के लिए खिलाफ जबर्दस्त आक्रोश व्याप्त है। मिस्र की जनता उन्हें पद से हटाने और देश में लोकतंत्र स्थापित करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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