राजा ने वही किया, जो सोनिया व करुणानिधि ने कहा : स्वामी
नई दिल्ली, 9 फरवरी (आईएएनएस)। जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.करुणानिधि को बड़ी मछली बताया है। स्वामी ने कहा है कि पूर्व संचार मंत्री ए.राजा तो मामूली कारकून हैं। राजा तो दोनों नेताओं के आदेश पर काम करते थे।
स्वामी ने आईएएनएस के साथ फोन पर एक साक्षात्कार में कहा, "राजा तो एक मामूली कारकुन हैं। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में बड़ी मछली तो सोनिया गांधी और करुणानिधि हैं। राजा ने वही किया, जो करुणानिधि और सोनिया ने आदेश दिया।"
ज्ञात हो कि डीएमके सांसद राजा ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट के बाद 14 नवम्बर को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। सीएजी के अनुसार दूसरी पीढ़ी के टेलीफोन स्पेक्ट्रम आवंटन में बरती गई अनियमितता के कारण सरकारी खजाने को 1.76 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। इस मामले में राजा फिलहाल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की हिरासत में हैं।
स्वामी ने कहा कि राजा की गिरफ्तारी तो मात्र मामले का एक छोर है। "मामले की सुनवाई ऊंचे लोगों तक जाएगी।"
पूर्व केंद्रीय मंत्री रह चुके स्वामी (71) ने कहा कि जितने भी लोग इस घोटाले में शामिल हैं, वह सभी को बेनकाब करेंगे। उन्होंने कहा, "इसीलिए मैंने करुणानिधि के खिलाफ एक मामला दायर किया है।"
ज्ञात हो कि स्वामी द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में अपने दम दायर की गई जनहित याचिका का ही परिणाम है कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन का मामला राजनीति के केंद्र में आया।
स्वामी ने कहा कि "सरकार के मुखिया के नाते प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अपने कार्यकाल के दौरान हुए घोटाले के प्रति जिम्मेदारी बनती है।"
स्वामी ने कहा, "मनमोहन सिंह भीष्म पितामह जैसा आचरण कर रहे हैं। जैसे कि जब द्रौपदी का चीर हरण हो रहा था तो भीष्म पितामह ने अपनी आंखें दूसरी तरफ कर ली थी।"
स्वामी ने आरोप लगाया कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के कार्यकाल में देश का अरबों रुपया लूट लिया गया है। फिर भी स्वामी महसूस करते हैं कि मनमोहन सिंह के इस्तीफे से समस्या नहीं सुलझने वाली।
स्वामी ने कहा, "..संप्रग सरकार को सत्ता छोड़ देनी चाहिए और नए चुनाव का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए। अन्यथा कोई उनसे (मनमोहन सिंह) अधिक कमजोर एवं भ्रष्ट व्यक्ति कुर्सी पर काबिज हो सकता है। मुझे प्रधानमंत्री की निजी ईमानदारी पर कोई संदेह नहीं है। लेकिन वह राजनीतिक मजबूरियों के तहत अपनी निष्क्रियता के जरिए नैतिक भ्रष्टाचार में लिप्त हैं।"
स्वामी ने सीएजी की रिपोर्ट पर सवाल खड़ा करने सम्बंधी बयान के लिए नए संचार मंत्री कपिल सिब्बल की भी आलोचना की।
स्वामी ने कहा कि सिब्बल को सोनिया गांधी का समर्थन है ".. अन्यथा उनके पास कोई राजनीतिक जमीन नहीं है।" स्वामी ने कहा कि सिब्बल को इसलिए संचार मंत्री बनाया गया है कि 2जी स्पेक्ट्रम के लाइसेंस रद्द न होने पाएं।
स्वामी ने आगे कहा, "लेकिन यह मामला पहली मार्च को सर्वोच्च न्यायालय में शुरू हो रहा है। हम सभी मामलों को तर्कसंगत परिणति तक पहुंचाने तक इस पर बराबर नजर रखेंगे।"
हारवर्ड युनिवर्सिटी और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-दिल्ली के पूर्व प्रोफेसर स्वामी का मानना है कि "दूरसंचार कम्पनियों को स्पेक्ट्रम आवंटित करने के लिए नीलामी सर्वोत्तम तरीका है। स्पेक्ट्रम एक दुर्लभ संसाधन है। किसी भी दुर्लभ सामग्री को नीलाम किया जाना चाहिए।"
एस-बैंड पर सामने आया ताजा स्पेक्ट्रम घोटाला राष्ट्रीय संसाधनों की लूट का एक दूसरा उदाहरण है।
लेकिन स्वामी ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की व्यावसायिक शाखा और एक निजी कम्पनी के बीच हुए करार के तहत एस-बैंड के इस्तेमाल के लिए आवंटित अंतरिक्ष स्पेक्ट्रम को लेकर पैदा हुए विवाद पर मनमोहन सिंह की आलोचना करने से बचने की कोशिश की।
स्वामी ने कहा, "ऐसा लगता है कि एस-बैंड करार के बारे में प्रधानमंत्री को बहुत बाद में जानकारी मिली। ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में राज्य मंत्री सुरेश पचौरी एस-बैंड के मुद्दे को देख रहे थे।"
स्वामी ने सिब्बल पर दोबारा निशाना साधते हुए कहा कि "जिस अंतरिक्ष आयोग के सिब्बल एक महत्वपूर्ण सदस्य थे, उसी आयोग ने करार को मंजूरी दी थी।"
लम्बे समय से सोनिया गांधी के आलोचक रहे स्वामी ने कहा, "सोनिया अपने पति राजीव की स्मृति के प्रति भी वफादार नहीं हैं। अन्यथा वह राजा और करुणानिधि के डीएमके से भला कैसे हाथ मिला सकती थी। जबकि राजीव करुणानिधि से घृणा करते थे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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