कश्मीर पर वार्ताकारों की रिपोर्ट फरवरी के आखिर तक
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार राज्य के हालात और कश्मीर पर आगे बढ़ने के सम्भावित रास्ते पर वार्ताकारों के अंतिम आकलन को लेकर काफी उत्सुक हैं। केंद्रीय गृह मंत्री पी.चिदम्बरम इस महीने के प्रारम्भ में जब जम्मू गए थे, तो इस मुद्दे को उनके समक्ष उठाया गया था।
एक अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, "मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को गृह मंत्री के समक्ष उठाया था और कहा था कि पहले से तैयार किया गया कोई खाका लोगों में आत्मविश्वास जगाने में मददगार साबित होगा, क्योंकि लोग इसका इंतजार कर रहे हैं।"
वार्ताकार, पत्रकार दिलीप पडगांवकर, शिक्षिका राधा कुमार और अर्थशास्त्री एम.एम.अंसारी इस महीने राज्य का एक और दौरा करेंगे। कश्मीर घाटी में पिछली गर्मियों में पैदा हुई अशांति के बाद अक्टूबर में तीनों वार्ताकारों की नियुक्ति की गई थी।
वार्ताकार अपने प्रस्तावित दौरे में अलगाववादियों से मिलने की कोशिश करेंगे। अलगाववादी अभी तक वार्ताकारों से बातचीत से इंकार करते रहे हैं।
अधिकारी ने कहा, "चाहे अलगाववादी उनसे मिलें या न मिलें, वार्ताकार अपनी रिपोर्ट सौंप देंगे, क्योंकि उनके पास समाज के अन्य सभी वर्गो की राय उपलब्ध है।"
ऐसे समय में इस बात का डर है कि यदि वार्ताकारों ने अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी तो नागरिक निराश हो सकते हैं और पिछली गर्मियों की तरह स्थिति फिर बिगड़ सकती है।
अधिकारी ने कहा, "जनता को कुछ उम्मीद दिलाने की जरूरत है।" अधिकारी ने कहा कि वार्ताकारों को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए प्रारम्भ में एक साल का समय दिया गया था, लेकिन स्थिति के मद्देनजर समय सीमा घटा कर इस वर्ष अप्रैल महीने तक कर दी गई और अब इसमें अतिरिक्त कटौती करते हुए इस महीने के अंत तक की समय सीमा तय कर दी गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
*












Click it and Unblock the Notifications