शास्त्री ने सरकारी कार के निजी इस्तेमाल पर किया था भुगतान

शास्त्री की ईमानदारी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब उनके बेटों ने उनकी सरकारी कार का निजी इस्तेमाल किया, तो उन्होंने सरकारी खजाने में उसका किराया जमा कराया।

इस घटना का जिक्र "लाल बहादुर शास्त्री : पास्ट फॉरवार्ड" (कोणार्क) नामक पुस्तक में है। पुस्तक को उनके बेटे और कांग्रेस नेता सुनील शास्त्री ने लिखा है।

सुनील शास्त्री कहते हैं कि वह समझते थे कि उनके बाबूजी के ओहदे के साथ उनके पास एक बड़ी आलीशान कार है। लाल बहादुर शास्त्री को सरकारी इस्तेमाल के लिए एक शेवरलेट इम्पाला कार मिली थी।

सुनील शास्त्री किताब में कहते हैं, "एक दिन मैंने बाबूजी के निजी सचिव से कहा कि वह ड्राइवर से कहें कि शेवरलेट लेकर घर आए। हमने ड्राइवर से चाबी मांगी और कार लेकर निकल गए।"

बाद में लाल बहादुर शास्त्री ने ड्राइवर से जवाब तलब किया, "तुम्हारे पास लॉगबुक है?" "जब ड्राइवर ने सहमति में सिर हिलाया तो बाबूजी ने उससे कहा कि पिछले दिन कार जितनी दूर चली थी, उसकी दूरी उसमें दर्ज करो। जब ड्राइवर ने दूरी 14 किलोमीटर बताई तो उन्होंने उसे सलाह दी कि इतनी दूरी को निजी इस्तेमाल में लिखो और उसके बाद उन्होंने अम्मा से कहा कि वह उनके निजी सचिव को इतनी दूरी का किराया दे दे ताकि उसे सरकारी खाते में जमा करा दिया जाए।"

लाल बहादुर शास्त्री जून 1964 से जनवरी 1966 तक देश प्रधानमंत्री रहे थे। ताशकंद में उनका उस समय निधन हो गया था, जब वह पाकिस्तान के साथ 1965 के युद्ध के बाद एक संधि पर हस्ताक्षर करने वहां गए हुए थे।

किताब में शास्त्री के जीवन के तमाम अनोखे क्षणों को चित्रित किया गया है। उन्होंने अपनी जिंदगी कैसे जी, किन मूल्यों को अपनाया और क्या उन्होंने सीख दी, ये सारी बातें किताब में बखूबी शामिल की गई हैं।

सुनील शास्त्री ने लिखा है कि पाकिस्तान के साथ 1965 के युद्ध में बुरी तरह घायल हुए एक भारतीय सैनिक से जब वह मिले थे, तो किस तरह उनकी आंखों से आंसू झरने लगे थे।

सुनील शास्त्री उस सैनिक के हवाले से लिखते हैं, "मेरी आंखों में आंसू नहीं बचे हैं, क्योंकि मेरी मौत करीब है ..लेकिन एक मेजर होने के बावजूद मैं अपने प्रधानमंत्री को सलामी देने के लिए खड़ा हो पाने में असमर्थ हूं।"

..और उस सैनिक की इन बातों पर प्रधानमंत्री शास्त्री अपनी भावनाओं को रोक नहीं सके थे। सुनील कहते हैं कि उन्होंने पहली बार अपने पिता को रोते हुए देखा था।

इसके अलावा किताब में शास्त्री के बारे में कई अन्य अनोखी बातें शामिल हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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