बजट पर होगी खनाल की अग्निपरीक्षा

काठमांडू, 9 फरवरी (आईएएनएस)। नेपाल में माओवादियों के समर्थन से प्रधानमंत्री पद पर काबिज हुए कम्युनिस्ट नेता झलनाथ खनाल जहां एक सप्ताह बाद भी अपनी कैबिनेट का गठन नहीं कर पाए हैं, वहीं अब बजट को लेकर भी उनकी अग्निपरीक्षा होने वाली है।

खनाल (61) के लिए 15 फरवरी, मंगलवार तक संसद द्वारा मौजूदा बजट पारित करा लेना आवश्यक होगा, अन्यथा राजस्व वसूली और सरकारी खर्च ठप्प हो जाएगा।

खनाल का सामना पूर्ववर्ती माधव कुमार नेपाल सरकार से विरासत में मिले हंगामी बजट से होगा। पूर्व की सरकार माओवादियों के विरोध के कारण मौजूदा वित्त वर्ष के लिए संसद में बजट पारित नहीं करा पाई थी।

उसके बाद तत्कालीन वित्त मंत्री सुरेंद्र पांडे को पिछले नवम्बर में सदन में हंगामे और हिंसा की अभूतपूर्व घटना के बाद अध्यादेश के जरिए बजट पेश करना पड़ा था। यहां तक कि उस दौरान माओवादी सांसदों ने पांडे से हाथापाई भी की थी।

माओवादियों के विरोध के कारण सरकार चार महीने विलम्ब से बजट पेश कर पाई थी, जिसके कारण विकास कार्य और अन्य गतिविधियां प्रभावित हुई थीं।

कानूनन अब अध्यादेश आधारित बजट संसद में 15 फरवरी तक पारित हो जाना चाहिए।

यदि यह काम असम्भव नहीं, तो कठिन तो जरूर है, क्योंकि संसद को दो-तिहाई बहुमत के जरिए इसे पारित करना है।

खनाल को माओवादियों के समर्थन से बहुमत जरूर हासिल है। लेकिन बजट के लिए उन्हें संसद में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी व अपने पूर्व सहयोगी नेपाली कांग्रेस का समर्थन भी हासिल करना होगा।

ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री का चुनाव जीतने के लिए खनाल ने नेपाली कांग्रेस से नाता तोड़ लिया था और माओवादियों के साथ नया गठबंधन बनाया। इसके कारण नेपाली कांग्रेस को अब विपक्ष में बैठना पड़ रहा है।

बिछुड़े सहयोगी के अलावा तराई की क्षेत्रीय पार्टियों का गुट भी बजट का समर्थन करने के लिए कठिन मोल-तोल कर सकता है। क्योंकि इस गुट को भी खनाल की पार्टी ने चुनाव के दौरान दरकिनार कर दिया था।

इसके अलावा नया संकट यह है कि खनाल पुराने बजट को पारित कराने के बदले एक नया बजट पेश करने की योजना बना रहे हैं। जबकि स्थिति यह है कि माओवादियों के साथ सत्ता बंटवारे को लेकर पैदा हुए विवाद के कारण वह अभी तक अपनी कैबिनेट की घोषणा नहीं कर पाए हैं।

प्रमुख अर्थशास्त्री बिश्वम्भर प्याकुरयाल ने कहा, "यह एक अपरिपक्व कदम है। चूंकि नेपाली वित्त वर्ष मध्य जुलाई से शुरू होता है, लिहाजा मौजूदा वित्त वर्ष के समाप्त होने में मात्र पांच महीने शेष हैं। इसलिए सरकार को नए बजट की कोशिश करने के बदले पुराने बजट को ही जारी रखना चाहिए।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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