'स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है दक्षिण एशिया' (लीड-1)
अरुण कुमार
वाशिंगटन, 9 फरवरी (आईएएनएस)। विश्व बैंक की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि भारत व अन्य दक्षिण एशियाई देश स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल की बीमारियों, मधुमेह, मोटापा व अन्य असंक्रामक बीमारियों (एनसीडी) बढ़ने से इन देशों में विकास प्रभावित हो सकता है।
अनुभवजन्य तथ्य तो कम हैं लेकिन पहले के अनुमान बताते हैं कि साल 2005 से लेकर 2010 तक दिल की बीमारियों, आघात और मधुमेह से होने वाली मौतों की वजह भारत व पाकिस्तान में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का मात्र एक प्रतिशत हिस्सा ही स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च होता है।
दक्षिण एशिया क्षेत्र में 15 से 69 वर्ष आयु के लोगों की मौत का बढ़ता कारण दिल की बीमारियां हैं। 'कैपिटलाइजिंग ऑन द डेमोग्राफिक ट्रांजीशन: टैक्लिंग नॉनकम्युनिकेबल डिसीजेस इन साउथ एशिया' रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण एशियाई लोग दुनियाभर के अन्य लोगों की तुलना में छह साल पहले ही दिल के दौरे का अनुभव ले लेते हैं।
हाल ही में हुए एक अध्ययन के मुताबिक बांग्लादेश, भारत, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका सहित दुनियाभर के 52 देशों के लोग (53 वर्ष) शेष दुनिया के लोगों (59 वर्ष) की तुलना में छह साल पहले ही पहले दिल के दौरे का अनुभव ले लेते हैं और उनमें मधुमेह, लिपिड की उच्च मात्रा, शारीरिक सक्रियता की कमी, खान-पान की स्वास्थ्यवर्धक आदतों का न होना जैसे जोखिम के कारक भी होते हैं।
नई रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण एशियाई लोगों की औसत आयु 64 वर्ष या उससे अधिक है लेकिन लोगों को बढ़ती उम्र के साथ जीवन जीने के लिए बेहतर स्थितियां, स्वस्थ पोषण व स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलती हैं जबकि विकसित देशों के लोगों को ये सभी सुविधाएं मिलती हैं।
इसके परिणामस्वरूप दक्षिण एशियाई लोगों में दिल की बीमारियों, कैंसर, मधुमेह और मोटापे का खतरा ज्यादा रहता है और इसके साथ ही स्वास्थ्य प्रणाली पर उनके इलाज व देखभाल का दबाव भी अधिक होता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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