सिमी के 5 कार्यकर्ता दोबारा गिरफ्तार (लीड-1)
मालूम हो कि गणतंत्र दिवस के मौके पर प्रदेश सरकार ने ऐसे कैदियों की रिहाई के निर्देश दिए थे जिनका आचरण अच्छा हो और वे अपनी सजा आधा पूरा कर चुके हों। शासन के इस निर्देश के चलते जेल प्रशासन ने उज्जैन के खाचरोद जेल में बंद पांच ऐसे कैदियों को छोड़ दिया जो कथित तौर पर सिमी के कार्यकर्ता हैं और उन पर राष्ट्रद्रोह जैसा मामला भी दर्ज है।
इस मामले के सुर्खियों में आने के बाद सरकार ने जेल महानिदेशक वी.के पवार को गुरुवार को उनके पद से हटा दिया और शुक्रवार को प्रमुख सचिव (जेल) सुरेश कुमार की छुट्टी कर दी। शासन ने रिहाई के आदेशों को भी निरस्त कर दिया।
उज्जैन के पुलिस महानिदेशक उपेंद्र जैन ने आईएएनएस को बताया कि जिन पांच सिमी कार्यकर्ताओं को गणतंत्र दिवस के मौके पर रिहा किया गया उन सभी को उन्हैल गांव से हिरासत में ले लिया गया है। इन सभी को जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।
ज्ञात हो कि इसके पहले राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इन कैदियों को रिहाई पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के मंत्री एवं अधिकारियों पर आरोप लगाया कि उन्होंने तीन करोड़ रुपये की रिश्वत लेकर सिमी के पांच कार्यकर्ताओं को जेल से रिहा करवा दिया।
कांग्रेस प्रवक्ता के.के. मिश्रा ने शुक्रवार को इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
मिश्रा ने दावा किया, "जेल मंत्री जगदीश देवड़ा, जेल मामले के प्रधान सचिव सुदेश कुमार, कारागार महानिदेशक वी.के. पवार और भाजपा के प्रदेश सचिव तपन भौमिक ने सिमी सदस्यों की रिहाई के लिए तीन करोड़ रुपये लिए। इसमें भौमिक की मुख्य भूमिका रही है।"
मिश्रा ने आईएएनएस से कहा, "भाजपा नेताओं के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) व सिमी कार्यकर्ता एक जैसे हैं और वे एक-दूसरे की मदद करते रहे हैं। मैं खुलासा करूंगा कि पैसे कैसे और कहां से आए।"
उल्लेखनीय है कि उज्जैन के खाचरोद उप कारागार प्रशासन ने 26 जनवरी को पांच सिमी सदस्यों- जादिल परवाज, ऐयाज रियाज अहमद, अकबर अहमद खान, मेहरुद्दीन शेख और इरशाद अली को रिहा किया था। इन सभी को राष्ट्र-विरोधी साहित्य रखने के आरोप में 31 मार्च, 2008 को गिरफ्तार किया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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