मिस्र में मुबारक के खिलाफ 'विदाई जुलूस' (लीड-3)

इस बीच राष्ट्रपति पद छोड़ने के चौतरफा दबाव से घिरे मुबारक ने कहा कि वह अपने पद से आजिज आ चुके हैं लेकिन उन्होंने इस समय इस्तीफा दिया तो पूरे देश में अफरा-तफरी मच जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोग उनके बारे में क्या कहते हैं।

मिस्र के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक काहिरा के तहरीर चौक पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान पिछले कुछ दिनों में आठ लोगों की मौत हो चुकी है और 800 से ज्यादा लोग जख्मी हुए हैं। वहीं संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि 25 जनवरी से जारी प्रदर्शन में कम से कम 300 लोगों की मौत हो चुकी है और 4000 हजार से ज्यादा घायल हो चुके हैं।

तहरीर चौक पर शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद लाखें प्रदर्शनकारी जुटे और उन्होंने 'मुबारक गद्दी छोड़ो' के नारे लगाए। तहरीर चौक पर भारी सुरक्षा बंदोबस्त किए गए थे और पहले की अपेक्षा सेना की मौजूदगी ज्यादा देखी गई। प्रदर्शनकारी बिना मुबारक के इस्तीफे की घेषणा के अपने घरों को वापिस जाने को तैयार नहीं हैं।

समाचार चैनल 'अल जजीरा' के मुताबिक नए प्रधानमंत्री अहमद शफीक ने गृहमंत्री से कहा था कि शुक्रवार को निकाले जाने वाले जुलूस को नहीं रोका जाए।

शफीक बुधवार को काहिरा में हुई हिंसा तथा इस ऐतिहासिक शहर में कानून एवं व्यवस्था चरमरा जाने की अभूतपूर्व घटना के लिए पहले ही माफी मांग चुके हैं।

संयम बरतने के आह्वान के बावजूद काहिरा के तहरीर चौक पर मौजूद प्रदर्शनकारी मुबारक के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं और वह राष्ट्रपति के समर्थकों के हमलों के बावजूद वहां से हटने को तैयार नहीं हैं। गुरुवार को काहिरा के संग्रहालय के समीप ताजा झड़पे हुईं। इस संग्रहालय में मिस्र की 7000 साल पुरानी सभ्यता के निशान मौजूद हैं।

काहिरा की सड़कों पर विदेशी पत्रकारों को निशाना बनाए जाने के एक दिन बाद शुक्रवार को यह जुलूस निकाला गया। पत्रकारों पर हमले की भारत सहित विभिन्न देशों ने निंदा की है।भारत ने मिस्र के दौरे के इच्छुक पत्रकारों के लिए परामर्श भी जारी किया है।

विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा ने गुरुवार रात को नई दिल्ली में कहा, "मिस्र में हो रहे घटनाक्रम की खबरें दे रहे पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने से बहुत दुख और आघात पहुंचा है। ऐसी घटनाएं अस्वीकार्य हैं और इन्हें तत्काल रोका जाना चहिए।"

बंदूकधारियों द्वारा हिरासत में लिए गए भारतीय पत्रकारों का हवाला देते हुए कृष्णा ने कहा, "पत्रकारों की फौरन रिहाई होनी चाहिए और सरकार को उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए।"

भारत सरकार ने कहा है कि इस समय काहिरा में करीब 3000 विदेशी एवं मिस्र के पत्रकार हैं और ज्यादातर के पास मिस्र प्रशासन की मान्यता नहीं है। कर्फ्यू का उल्लंघन करते हुए करीब 10,000 प्रदर्शनकारियों ने शुक्रवार के प्रदर्शन से पूर्व गुरुवार की रात तहरीर चौक पर ही बिताई।

11 दिन जारी जनविद्रोह के बीच मुबारक ने कहा, "लोग मेरे बारे में क्या कहते हैं, इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। फिलहाल मुझे सिर्फ अपने मुल्क की चिंता है, मुझे मिस्र की फिक्र है।"

82 वर्षीय मुबारक ने एबीसी न्यूज से कहा कि वह राष्ट्रपति पद से आजिज आ चुके हैं-इस पद पर वह पिछले 30 बरस से हैं। उन्होंने कहा कि वह इसी समय पद छोड़ना चाहते हैं लेकिन उन्हें डर है कि उनके ऐसा करने से मिस्र में अफरा-तफरी मच जाएगी।

मुबारक का यह साक्षात्कार राष्ट्रपति भवन में लिया गया जहां वह अपने परिवार के साथ रहते हैं। राष्ट्रपति भवन पर सशस्त्र सैनिकों का भारी जमावड़ा, टैंक और कंटीले तार लगे हुए हैं।

उन्होंने कहा कि तहरीर चौक पर पिछले कुछ दिन से जारी हिंसा से उन्हें तकलीफ पहुंची है लेकिन उन्होंने दावा किया कि इसके लिए उनकी सरकार जिम्मेदार नहीं है। मुबारक ने 11दिन से जारी इस हिंसा के लिए मुस्लिम ब्रदरहुड को दोषी ठहराया।

राष्ट्रपति ने कहा, "मैं बहुत दुखी हूं..मैं म्रिसवासियों को आपस में लड़ते नहीं देख सकता।"

मुबारक ने साक्षात्कारकर्ता से कहा कि सोमवार रात के अपने भाषण के बाद से वह राहत महसूस कर रहे हैं। इस भाषण में उन्होंने कहा था कि वह सितम्बर में अपना कार्यकाल समाप्त होने पर पद छोड़ देंगे लेकिन अभी पद से नहीं हटेंगे।

आधे घंटे के इस साक्षात्कार में मुबारक के साथ उनका पुत्र गमाल भी था। मुबारक ने कहा कि उनकी यह कभी मंशा नहीं रही कि उनका पुत्र उनका उत्तराधिकारी बने।

मुबारक ने कहा,"मैं दोबारा राष्ट्रपति पद का चुनाव नहीं लड़ना चाहता। मैंने कभी नहीं चाहा कि मेरे बाद गमाल राष्ट्रपति बने।"

इस साक्षात्कार के दौरान मुबारक ने जोर देकर कहा, "मैं भागूंगा नहीं..मैं इसी धरती पर प्राण त्यागूंगा।"

मुबारक ने मिस्र में इसी क्षण बदलाव की बात कहने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को बहुत अच्छा इंसान बताया। मुबारक ने कहा कि "मैंने ओबामा से कहा कि आप मिस्र की संस्कृति को नहीं समझे और नहीं जानते कि मेरे इस समय पद छोड़ने से क्या होगा।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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