बिहार में 40 मरीज़ों की मौत

मणिकांत ठाकुर
बीबीसी संवाददाता, पटना
सरकारी डॉक्टरों की हड़ताल के कारण बिहार में लोग परेशान हैं.
बिहार के सभी छह सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के हड़ताल के कारण तीन दिन में कम से कम 40 मरीज़ों की मौत हो गई है.
ये मौतें तीन दिन में हुई हैं लेकिन अस्पतालों में हालात बेहद ख़राब बताए जाते हैं.
अकेले पटना मेडिकल कॉलेज में अब तक 28 मरीज़ों की मौत हो गई.
रविवार 30 जनवरी को गया मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मारपीट की एक घटना के विरोध में वहाँ के जूनियर डॉक्टर उसी समय से हड़ताल पर चले गये हैं.
उसके बाद राज्य के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के जूनियर डॉक्टर भी हड़ताल में शामिल हो गए.
हड़ताली डॉक्टरों की मांग है कि अस्पतालों में उनकी सुरक्षा की गारंटी संबंधी क़ानून बने और गया में जूनियर डॉक्टरों के साथ मारपीट के ज़िम्मेदार विधायक सुरेन्द्र यादव को गिरफ़्तार करके उनके ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की जाए.
इनका आरोप है कि एक महिला के इलाज़ में लापरवाही बताकर विधायक ने अपने अंगरक्षकों के द्वारा वहाँ जूनियर डॉक्टरों पर गोली चलवा दी, जिससे दो डॉक्टर ज़ख़्मी हो गए.
दोनों अंगरक्षकों को न सिर्फ निलंबित कर दिया गया है, बल्कि उन्हें गिरफ़्तार करके जेल भेज दिया गया है.
इस कार्रवाई से नाराज़ बिहार पुलिस मेंस एसोसिएशन ने राज्य भर में अपने पुलिस जवानों की हड़ताल की धमकी दे दी है.
उधर गिरफ़्तारी से बचने के लिए राष्ट्रीय जनता दल के विधायक सुरेन्द्र यादव खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं.
इस बीच घटना से जुड़े तीन पक्षों की तरफ़ से छह प्राथमिकियां ( एफ.आइ.आर.) दर्ज़ की गई हैं.
जूनियर डॉक्टरों पर भी पुलिस जीप में आग लगाने और मारपीट करने का आरोप है.
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे का कहना था,‘‘ पूरी जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई ज़रूर होगी लेकिन जूनियर डॉक्टर और पुलिस जवान- दोनों से जुड़े संगठनों से अपील है कि हड़ताल का सहारा लेकर आम लोगों की तकलीफें न बढ़ाएं.’’
दरअसल राज्य सरकार दुविधा में फंस गयी है क्योंकि दोनों पक्ष अपना दबाव बढ़ा रहे हैं. उधर बड़े सरकारी अस्पतालों में चिकत्सा -सेवाओं पर बुरा असर पड़ने से वहाँ भर्ती मरीज़ों की मुश्किलें बढ़ गयी हैं.












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