विपक्ष ने मांगों की सूची जारी की, कहा मुबारक देश छोड़ें (राउंडअप)

काहिरा, 1 फरवरी (आईएएनएस)। मिस्र के मुख्य विपक्षी नेता मोहम्मद अल बरदई ने मंगलवार को राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक को सत्ता से हटने और देश छोड़कर जाने के लिए कहा। विपक्ष ने वार्ता शुरू करने के लिए अपनी मांगों की पहली सूची जारी की है।

समाचार एजेंसी 'सिन्हुआ' के मुताबिक राष्ट्रपति मुबारक को सत्ता से हटाने के लिए काहिरा के तहरीर चौक पर मंगलवार को करीब एक लाख प्रदर्शनकारी एकत्र हुए।

सेना द्वारा प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग न करने की घोषणा के बाद शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के महत्व का उल्लेख करते हुए अल बरदई ने कहा, "यदि राष्ट्रपति अपने पद से हटते हैं तो सरकार के साथ वार्ता शुरू होगी।"

समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक मांगों की सूची में पहली मांग राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक का इस्तीफा 'और उनके शासन का अंत' है।

विपक्ष की दूसरी मांग एक परवर्ती नेतृत्व का गठन और देश का नया संविधान लिखने के लिए एक समिति का गठन करना है।

विपक्ष ने मुबारक की नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रभुत्व वाली संसद को भंग करने की भी मांग की है। इस सूची को उप राष्ट्रपति उमर सुलेमान के पास भेजा गया है।

ज्ञात हो कि उप राष्ट्रपति ने सोमवार शाम को कहा था कि वह 'सभी राजनीतिक पार्टियों के साथ' वार्ता की शुरुआत करेंगे।

मांगों की इस सूची पर कई विपक्षी समूहों ने हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा है कि यदि उनकी मांगों को सुलेमान द्वारा तय की गई समयसीमा में लागू किया जाता है तो वार्ता की शुरुआत हो सकती है।

सिन्हुआ के मुताबिक अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के पूर्व अक्ष्यक्ष अलबरदई ने गत गुरुवार को दावा किया कि यदि मुबारक सत्ता छोड़ते हैं तो वह अंतरिम सरकार का नेतृत्व कर सकते हैं।

अलबरदई ने न्यूज चैनल 'अल अरबिया' से कहा, "मैंने प्रदर्शनकारियों से सुना है कि वे मुबारक के शासन का खात्मा चाहते हैं, यह आज (मंगलवार) तक नहीं होता तो अधिकतम शुक्रवार तक हो जाएगा।" उन्होंने कहा कि मिस्र के लोगों ने शुक्रवार के दिन को 'प्रस्थान का दिन' निर्धारित किया है।

उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि इसके पहले राष्ट्रपति मुबारक अपने 30 साल के शासन के बाद सत्ता छोड़ देंगे और देश छोड़कर चले जाएंगे..मुझे नहीं लगता है कि वह और रक्त देखना चाहते हैं।"

सोमवार को उप राष्ट्रपति उमर सुलेमान ने घोषणा की कि राष्ट्रपति ने विपक्षी दलों से तुरंत वार्ता शुरू करने के लिए उनकी नियुक्ति की है लेकिन सबसे बड़े विपक्षी प्रतिबंधित दल मुस्लिम ब्रदरहुड ने वार्ता में भाग लेने से इंकार कर दिया।

ज्ञात हो कि तहरीर चौक पर प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक राष्ट्रपति अपने पद से हटते नहीं है तब तक वह पीछे नहीं हटेंगे। अल बरदई ने कहा कि वह मांगों की सूची का समर्थन करते हैं और वह उप राष्ट्रपति के साथ सम्पर्क में हैं, बशर्ते कि राष्ट्रपति अपने पद से हटें।

पूरे देश के करीब आठ करोड़ लोगों के बीच अशांति फैल चुकी है। अब तक के प्रदर्शनों में कम से कम 150 लोग मारे गए हैं। गत एक सप्ताह से जारी हिंसा से देश की अर्थव्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचा है। देश के शेयर बाजार, बैंक शैक्षिक संस्थान आदि बंद हैं।

व्यापारियों के अनुसार अलेक्जेंड्रिया का बंदरगाह भी बंद है लेकिन स्वेज नहर के जरिए अंतर्राष्ट्रीय व्यापार चल रहा है।

काहिरा के अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अव्यवस्था की स्थिति है। यहां हजारों की संख्या में विदेशी नागरिक स्वदेश लौटने के लिए जमा हैं। अब तक 600 भारतीय काहिरा छोड़ चुके हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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