मिस्र में राष्ट्रपति समर्थक और विरोधियों में संघर्ष
काहिरा/वाशिंगटन। मिस्र में राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक को सत्ता से बेदखल करने के लिए जहां उनके खिलाफ लाखों लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं राष्ट्रपति के समर्थन में भी लोग लामबंद होने लगे हैं। बुधवार को राष्ट्रपति के समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं, जिनमें दर्जनों लोगों के घायल होने की सूचना है।
एक दिन पहले तक मुबारक को सत्ता से बेदखल करने के लिए आंदोलनकारियों का केंद्र बने तहरीर चौक पर बुधवार को कुछ अलग नजारा दिखा। प्रदर्शनकारियों के साथ ही यहां मुबारक समर्थक भी जुटे और दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़पें हुईं। इससे पहले राष्ट्रपति मुबारक ने कहा कि वह सितम्बर के पहले अपने पद से नहीं हटेंगे। जबकि अमेरिका ने राष्ट्रपति से तत्काल लोकतंत्र की व्यवस्था शुरू करने की अपील की।
समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक हजारों की संख्या में दोनों पक्षों के लोगों ने लाठी और पत्थरों के साथ एक दूसरे पर हमला बोल दिया। झड़पों में चाकुओं से हमले करने और गोलियों की आवाज की रपटें भी मिली हैं।समाचार एजेंसी के अनुसार झड़पें गलियों में शुरू हुईं। इसके बाद अव्यवस्था से बचने के लिए मची भगदड़ में कुछ लोगों के कुचले जाने की भी सूचना है।
समाचार चैनल अल अरबिया और अन्य विदेशी मीडियाकर्मियों ने कहा कि राष्ट्रपति के समर्थकों ने उन पर भी हमले किए। मिस्र के समाचार पत्र 'अल मस्री अल यूम' ने कहा कि एक अन्य समाचार पत्र के मुख्यालय पर हुए हमले के बाद वह अपने कार्यालयों को खाली कर रहा है।
व्यापक प्रदर्शनों के चलते देश में रेल सेवाएं अवरुद्ध हैं लेकिन इंटरनेट सेवाएं बहाल हो गई हैं। मंगलवार रात को टेलीविजन पर प्रसारित राष्ट्र के नाम संदेश में 82 वर्षीय मुबारक ने कहा कि वह अगले कार्यकाल के लिए चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे। मुबारक ने सितम्बर के बाद सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण सुनिश्चित कराने का वादा किया।
उन्होंने कहा, "मेरी पहली जिम्मेदारी स्थिरता सुनिश्चित करना है और अगले कुछ महीनों में मैं देश की स्थिरता सुनिश्चित करने का काम करूंगा।"मुबारक ने कहा, "मैं सैनिक हूं जिसने युद्ध और शांति के दौरान देश की सेवा की और मैं मिस्र की धरती पर ही मरूंगा।"
ज्ञात हो कि राष्ट्रपति ने यह घोषणा काहिरा के तहरीर चौक पर 10 लाख लोगों के विरोध प्रदर्शन और 'मार्च ऑफ ए मिलियन' रैली निकालने के बाद की। पिछले आठ दिनों से जारी प्रदर्शनों के चलते देश भर में अशांति का माहौल है। मिस्र की जनता मुबारक को अपने पद से हटने की मांग कर रही है। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के पूर्व अध्यक्ष मोहम्मद अल बरदई ने समाचार चैनल 'अल अरबिया' से कहा कि मुबारक वैधता खो चुके हैं इसलिए लोग अब उनका इस्तीफा चाहते हैं।
अल बरदई ने कहा कि मुबारक के अभिभाषण से लोगों की मांगें पूरी नहीं हुई हैं उन्होंने तत्काल और कदम उठाने की मांग की। विपक्षी पार्टी मुस्लिम ब्रदरहुड ने भी राष्ट्रपति की पेशकश को ठुकरा दिया।
मुस्लिम ब्रदरहुड के एक प्रवक्ता ने कहा, "राष्ट्रपति के अभिभाषण से लोगों की कोई भी मांग पूरी नहीं हुई।"
ओबामा ने कहा, मिस्र में बदलाव शुरू हो :
राष्ट्रपति मुबारक द्वारा सितम्बर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा न लेने की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिन मुश्किल भरे होंगे। उन्होंने कहा कि मिस्र में बदलाव अभी शुरू होना चाहिए।
काहिरा में मुबारक के बयान के तीन घंटे बाद ही व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में ओबामा ने कहा, "हम अमेरिका के लम्बे अर्से से सहयोगी रहे देश के इतिहास में नए अध्याय की शुरूआत के गवाह बन रहे हैं।"
ओबामा ने अपने दीर्घकालीन सहयोगी देश मिस्र और वहां प्रदर्शन कर रहे लोगों की इच्छाओं का समर्थन जारी रखने की वकालत की।
ओबामा ने कहा, "बदलाव अर्थपूर्ण होना चाहिए और यह शांतिपूर्ण होने के अलावा अभी से शुरू हो।"
मिस्र सेना का प्रदर्शन खत्म करने का अनुरोध :
मिस्र की सेना के एक प्रवक्ता ने बुधवार को प्रदर्शनकारियों से अनुरोध किया कि राष्ट्र के स्थायित्व की खातिर अब वे विरोध प्रदर्शन समाप्त कर घरों को लौट जाएं।समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार यह अनुरोध सरकारी टेलीविजन पर उस समय किया गया जब हजारों की तादाद में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के खिलाफ फिर से जुटना शुरू कर दिया।
इससे पहले मंगलवार देर रात मुबारक ने कहा था कि वह सितम्बर में अपना कार्यकाल समाप्त होने पर ही पद से हटेंगे।
तुर्की ने कहा, संकट का लोकतांत्रिक समाधान हो :तुर्की के प्रधानमंत्री रेसेप तायिप एर्दोगन ने मिस्र के नेताओं से देश में मौजूदा राजनीतिक संकट का लोकतांत्रिक समाधान सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने मुबारक से अपील की है कि वह जनता की मांगों को बेझिझक स्वीकार करें।
समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक तुर्की की संसद में अपनी सत्ताधारी एके पार्टी के सदस्यों की एक बैठक में एर्दोगन ने कहा, "कोई भी ताकत लोगों की लोकतांत्रिक मांगों को अनसुना नहीं कर सकती। कोई भी शक्ति जनता की अवज्ञा नहीं कर सकती।"












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